बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू को एक बार फिर मजबूत स्थिति में ला खड़ा किया है। 43 सीटों से छलांग लगाकर सीधे 85 तक पहुंची जेडीयू अब संगठन में बड़े फेरबदल की तैयारी में दिख रही है। पार्टी के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम की हो रही है, वह है—नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार।
निशांत की एंट्री पर तेज़ हुई हलचल
पिछले कुछ महीनों से ही कार्यकर्ताओं की ओर से निशांत को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग उभर रही थी। कई जगह पोस्टर लगे, जनसभाओं में भी इस मुद्दे को उठाया गया। कार्यकर्ताओं का कहना है कि नीतीश कुमार की उम्र और स्वास्थ्य को देखते हुए पार्टी को अगले नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहिए—और उस भूमिका में निशांत सबसे उपयुक्त चेहरे के रूप में देखे जा रहे हैं।
पार्टी सूत्रों के अनुसार, चुनाव संपन्न होने के साथ ही अब निशांत की राजनीतिक एंट्री पर गंभीर मंथन शुरू हो गया है। बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार के भरोसेमंद वरिष्ठ नेता और सलाहकार लगातार उन्हें इसके लिए तैयार कर रहे हैं।
“नीतीश के बाद पार्टी की पकड़ कायम रख सकने वाला चेहरा सिर्फ निशांत”
जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि पार्टी का मजबूत आधार पिछड़ा और अति पिछड़ा समाज है। इस वोट बैंक को एकजुट रखने के लिए ऐसा चेहरा चाहिए जो नीतीश की राजनीतिक सोच को आगे बढ़ा सके।
उनके मुताबिक, “नीतीश कुमार के बाद अगर कोई बैलेंस बना सकता है तो वह सिर्फ निशांत हैं। पार्टी का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए उन्हें आगे आना ही होगा।”
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राजनीतिक मामलों के जानकारों का मानना हैं कि क्षेत्रीय दलों में नेतृत्व का हस्तांतरण प्रायः परिवार के भीतर ही होता है।जानकार मानते हैं कि,नीतीश कुमार अब अपने राजनीतिक सफर के अंतिम पड़ाव पर हैं। ऐसे में जेडीयू के सामने स्वाभाविक उत्तराधिकारी के रूप में निशांत ही दिखाई देते हैं। परिवार से चेहरे के आने से वोट बैंक मजबूत रहता है और पार्टी को स्थिरता मिलती है।”
जानकारों का कहना हैं कि पिछड़ा–अतिपिछड़ा राजनीति को ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए परिवार का कोई चेहरा नेतृत्व में होना जरूरी है, और यही कारण है कि इस समय निशांत चर्चा के केंद्र में हैं।
जेडीयू और बीजेपी नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
जेडीयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि पार्टी के भीतर निशांत की भूमिका को लेकर उत्साह है।उधर, बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी निशांत की एंट्री को “खुशी की बात” बताया था। दोनों दलों की यह प्रतिक्रिया बताती है कि गठबंधन राजनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है।
सदस्यता अभियान में निभा रहे ‘बैकएंड रोल’
जेडीयू के कार्यकर्ताओं के मुताबिक पार्टी इस समय दो करोड़ सदस्यों का लक्ष्य लेकर अभियान चला रही है और इस पूरी प्रक्रिया में निशांत कुमार को प्रमुख भूमिका सौंपी गई है।सूत्रों के अनुसार, खरमास खत्म होते ही निशांत स्वयं औपचारिक रूप से जेडीयू की सदस्यता ग्रहण करेंगे, जिसके बाद उनकी सक्रिय राजनीति की शुरुआत मानी जाएगी।