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प्रियंका गांधी से मुलाकात के बाद प्रशांत किशोर को लेकर अटकलें तेज, क्या कांग्रेस से जुड़ने की बनेगी बात?

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नई दिल्ली/पटना। चुनावी रणनीतिकार और जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में हैं। हाल ही में उनकी कांग्रेस नेता और वायनाड सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा से हुई मुलाकात के बाद सियासी गलियारों में नए कयास लगाए जाने लगे हैं। इस मुलाकात को लेकर न तो कांग्रेस और न ही जनसुराज की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है, लेकिन इसके निहितार्थों पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, यह बातचीत आने वाले वर्षों में उत्तर प्रदेश, पंजाब समेत पांच राज्यों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में हुई मानी जा रही है। बिहार विधानसभा चुनाव के करीब एक महीने बाद हुई इस बैठक को सामान्य शिष्टाचार भेंट से अलग नजरिए से देखा जा रहा है।

बिहार चुनाव के नतीजों के बाद बदला सियासी समीकरण

यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी को करारा झटका लगा। पार्टी एक भी सीट हासिल नहीं कर सकी और अधिकांश उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। चुनावी नतीजों ने किशोर की राजनीतिक रणनीति और भविष्य की दिशा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

दूसरी ओर कांग्रेस के लिए भी बिहार चुनाव उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहे। पार्टी 61 सीटों पर लड़कर केवल छह सीटों तक सिमट गई, जबकि 2020 में उसे इससे कहीं बेहतर परिणाम मिले थे। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इसी साझा संकट ने संवाद की जमीन तैयार की है।

केवल मुलाकात या बड़े फैसले की आहट?

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रियंका गांधी और प्रशांत किशोर की यह बातचीत संभावनाओं को टटोलने की कोशिश हो सकती है। कांग्रेस संगठन को नई रणनीतिक धार और चुनावी मजबूती की तलाश है, वहीं किशोर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी मंच की जरूरत महसूस हो रही है। ऐसे में दोनों पक्षों के हित एक-दूसरे से जुड़ते नजर आ रहे हैं।

हालांकि पार्टी सूत्र फिलहाल इसे वैचारिक चर्चा बता रहे हैं, लेकिन सियासी हलकों में इसे कांग्रेस में किशोर की संभावित भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है।

गांधी परिवार से पुराना नाता

प्रशांत किशोर और गांधी परिवार के बीच संवाद नया नहीं है। 2021 में जेडीयू से अलग होने के बाद किशोर ने कांग्रेस नेतृत्व के समक्ष पार्टी को पुनर्जीवित करने का एक विस्तृत खाका पेश किया था। 2022 में सोनिया गांधी के आवास पर हुई अहम बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी भी शामिल थे, जहां संगठनात्मक सुधार और चुनावी रणनीति पर मंथन हुआ था।

उस समय कांग्रेस ने ‘एम्पावर्ड एक्शन ग्रुप’ में शामिल होने का प्रस्ताव दिया था, जिसे किशोर ने ठुकरा दिया। मतभेदों के चलते बातचीत आगे नहीं बढ़ सकी।

फिर खुला पुराना अध्याय

अब बिहार चुनाव के बाद प्रियंका गांधी से हुई नई मुलाकात ने पुराने अध्याय को दोबारा चर्चा में ला दिया है। सवाल यही है कि क्या इस बार दोनों पक्ष पिछली असहमति को पीछे छोड़ पाएंगे, या यह बातचीत सिर्फ राजनीतिक विमर्श तक ही सीमित रहेगी।

फिलहाल इतना तय है कि प्रशांत किशोर और कांग्रेस को लेकर सियासी चर्चाएं आने वाले दिनों में और तेज होंगी, और राजनीति के गलियारों में यह सवाल लगातार गूंजता रहेगा—क्या प्रशांत किशोर कांग्रेस की नई रणनीति का हिस्सा बनने जा रहे हैं?

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