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सिंघिया प्रखंड में शिक्षा विभाग बना ‘अघोषित लूटतंत्र’, बीईओ की चुप्पी पर उठ रहे गंभीर सवाल

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बीईओ की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल
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समस्तीपुर | सिंघिया:-समस्तीपुर जिले के सिंघिया प्रखंड में वर्तमान प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी (बीईओ) के कार्यकाल में शिक्षा विभाग पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब तक किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। बीईओ की रहस्यमयी चुप्पी ने पूरे तंत्र पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

प्रखंड अंतर्गत कई स्कूलों में अनियमितताओं की शिकायतें मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से सार्वजनिक हो चुकी हैं, बावजूद इसके शिक्षा विभाग आंख मूंदे बैठा है। जानकारों का कहना है कि यह चुप्पी कहीं न कहीं भ्रष्टाचार को मौन समर्थन देने जैसी प्रतीत हो रही है।

₹20 वसूली से लेकर फर्जी एमडीएम तक के आरोप

हाल ही में महरा पंचायत स्थित महरा उत्क्रमित मध्य विद्यालय के प्रधानाध्यापक पर प्रत्येक छात्र से ₹20 की अवैध वसूली का आरोप सामने आया, जिसकी चर्चा सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय मीडिया चैनलों तक हुई। इसके बावजूद न तो किसी प्रकार की जांच हुई और न ही कोई कार्रवाई।

वहीं लगमा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में चुनाव के दौरान विद्यालय बंद रहने के बावजूद मध्याह्न भोजन (MDM) के संचालन का मामला सामने आया, जो सीधे तौर पर सरकारी धन की बंदरबांट की ओर इशारा करता है।

इसके अलावा रामपुरा विद्यालय में भी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें हैं, लेकिन अब तक प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की नजर इन मामलों पर नहीं पड़ी—या फिर जानबूझकर नजर फेर ली गई?

प्रखंड प्रमुख ने मांगी कार्रवाई, मिला सन्नाटा

इन तमाम मामलों को लेकर सिंघिया प्रखंड प्रमुख बैजू साहू ने लिखित रूप से कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शिक्षा पदाधिकारी द्वारा अब तक उन्हें कोई जवाब तक नहीं दिया गया। इससे नाराज प्रखंड प्रमुख ने मीडिया के सामने आकर खुलकर असंतोष जाहिर किया।

प्रखंड प्रमुख ने बताया कि,हमने इस गंभीर विषय को लेकर 17 तारीख को बैठक बुलाई है। अब देखना यह है कि कार्रवाई होती है या फिर फाइलों में ही भ्रष्टाचार दबा दिया जाएगा।”

सबकी नजर 17 तारीख की बैठक पर
अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारी भ्रष्टाचार पर कार्रवाई करेंगे, या फिर हमेशा की तरह जांच और बैठक के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

सिंघिया प्रखंड की जनता और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि बच्चों की शिक्षा और उनके हक पर डाका डालने वालों को कब सजा मिलेगी, और क्या प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी की चुप्पी की भी कभी जांच होगी?

फिलहाल, 17 तारीख की बैठक पर सबकी नजर टिकी है—क्योंकि यहीं से तय होगा कि शिक्षा विभाग सच में सुधरेगा या भ्रष्टाचार यूं ही फलता-फूलता रहेगा।

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