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गया में शासन और साधना का संगम, ‘मंथन-2025’ से नीतीश ने अफसरशाही को दिया ज़मीनी काम का मंत्र

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गया।बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का बुधवार का गया दौरा सिर्फ एक प्रशासनिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा। इस यात्रा में शासन की समीक्षा और आध्यात्मिक संदेश—दोनों की स्पष्ट झलक देखने को मिली। मुख्यमंत्री ने गया स्थित विपार्ड में आयोजित दो दिवसीय ‘मंथन-2025’ कार्यशाला का शुभारंभ किया और राज्य के प्रमंडलीय आयुक्तों तथा जिलाधिकारियों के साथ सामूहिक बैठक और फोटो सत्र में हिस्सा लिया।

‘मंथन-2025’ को सरकार की कार्यशैली को नए सिरे से दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने अफसरों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि योजनाओं की सफलता आंकड़ों या रिपोर्ट से नहीं, बल्कि आम लोगों के जीवन में दिखने वाले बदलाव से तय होगी। उन्होंने जवाबदेही, तय समय में काम और जनसंवेदनशीलता को प्रशासन की बुनियादी शर्त बताया।

अफसरों को जनता से जुड़ने का संदेश

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता देने की हिदायत दी। उनका कहना था कि शासन तभी भरोसेमंद बनता है, जब प्रशासन जनता के दरवाज़े तक पहुंचे।

फोटो सेशन बना अनुशासन और एकजुटता का प्रतीक

विपार्ड परिसर में आयोजित सामूहिक फोटो सेशन के दौरान सरकार और प्रशासन की सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीकात्मक संदेश भी सामने आया। वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि आने वाले समय में योजनाओं की सख्त निगरानी और समीक्षा की जाएगी।

महाबोधि में बुद्ध वंदना

प्रशासनिक कार्यक्रमों के बाद मुख्यमंत्री महाबोधि मंदिर में भगवान बुद्ध के दर्शन और पूजा-अर्चना करेंगे। गया की धरती पर यह कार्यक्रम सिर्फ धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि इसे शांति, करुणा और सामाजिक सौहार्द के संदेश के रूप में भी देखा जा रहा है।

सत्ता, सेवा और संवेदना की एक तस्वीर

‘मंथन-2025’ के जरिए शासन को धार देने और महाबोधि में नमन के जरिए आत्मिक संतुलन साधने का यह दौरा साफ संकेत देता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए प्रशासन और संवेदना एक-दूसरे से अलग नहीं हैं।

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