रोसड़ा (समस्तीपुर):महाराजा अहिवरण जयंती के पावन अवसर पर शुक्रवार को समस्तीपुर जिले के रोसड़ा शहर में बरनवाल समाज द्वारा आस्था, इतिहास और सांस्कृतिक गौरव से ओतप्रोत भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस ऐतिहासिक अवसर पर सैकड़ों की संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक गेरुआ वस्त्र धारण कर, हाथों में बैनर-पोस्टर लेकर नगर भ्रमण किया, जिससे पूरे शहर में उत्सव का माहौल बन गया।
उल्लेखनीय है कि महाराजा अहिवरण को प्राचीन काल में सामाजिक संगठन, व्यापारिक समृद्धि और नैतिक मूल्यों के संरक्षक शासक के रूप में जाना जाता है। बरनवाल समाज उन्हें अपना आदि पुरुष मानता है और उनकी जयंती को समाज की पहचान, एकता और सांस्कृतिक चेतना के प्रतीक के रूप में मनाता है।
निर्धारित मार्ग से निकली भव्य शोभायात्रा
सुबह करीब 10 बजे अहिवरण विवाह भवन से शोभायात्रा का शुभारंभ हुआ। जुलूस बैजू चौक, मैन मार्केट, गुदरी बाजार, महावीर चौक, थाना रोड, पुरानी चौक होते हुए पुनः अहिवरण विवाह भवन पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरे मार्ग में जयघोष, भक्ति गीतों और अनुशासित सहभागिता ने आयोजन को गरिमामय बना दिया।
महिलाओं की सहभागिता बनी आकर्षण का केंद्र
शोभायात्रा में शामिल महिलाओं ने समाज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत करते हुए यह संदेश दिया कि इतिहास और परंपराओं के संरक्षण में नारी शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। जगह-जगह स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
समाज की एकता और नई पीढ़ी को संदेश
बरनवाल समाज के वरिष्ठ सदस्य विनोद देव ने बताया कि
“महाराजा अहिवरण केवल एक शासक नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाली विचारधारा के प्रतीक हैं। हम लोग उनके वंशज हैं और उनके जन्मदिवस के अवसर पर इस शोभायात्रा का उद्देश्य समाज की एकता, इतिहास और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।”
28 दिसंबर को होगा भव्य सांस्कृतिक आयोजन
उन्होंने जानकारी दी कि महाराजा अहिवरण जयंती के उपलक्ष्य में 28 दिसंबर 2025 को दोपहर 3 बजे से रात्रि 9 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान लोकगीत, नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं समाज के प्रबुद्धजनों के विचार रखे जाएंगे।
शांतिपूर्ण रहा आयोजन
पूरे आयोजन के दौरान विधि-व्यवस्था पूरी तरह शांतिपूर्ण रही। महिलाओं, युवाओं और समाज के लोगों में कार्यक्रम को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। बताते चलें कि,महाराजा अहिवरण को प्राचीन काल में उत्तर भारत के एक प्रतिष्ठित शासक के रूप में माना जाता है।
ऐतिहासिक और सामाजिक परंपराओं के अनुसार अहिवरण एक प्राचीन क्षेत्र था, जिससे कई व्यापारी और समाजिक समूहों का संबंध बताया जाता है।
बरनवाल समाज महाराजा अहिवरण को अपना आदि पुरुष मानता है और उनसे अपने वंश की परंपरा को जोड़ता है।
माना जाता है कि महाराजा अहिवरण के शासनकाल में व्यापार, सामाजिक संगठन और सांस्कृतिक मूल्यों को विशेष बढ़ावा मिला।
समाज की एकता, नैतिक आचरण और परंपराओं के संरक्षण को उन्होंने अपने शासन का आधार बनाया।
आज भी विभिन्न क्षेत्रों में बरनवाल समाज द्वारा महाराजा अहिवरण जयंती को श्रद्धा, सम्मान और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
नेतृत्व और योगदान सराहनीय
कार्यक्रम का सफल संचालन ईशा देवी, संयंका शीला और आभा के नेतृत्व में किया गया। आयोजन में संगीता, लामी, प्रियंका, तिमी, नीता चक्रवर्ती सहित अन्य महिला सदस्यों तथा समाज के पुरुषों की भूमिका भी सराहनीय रही।