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‘एक रुपया लगाओ, 20 कमाओ’ – खंजाहांपुर के किसान ब्रोकली की खेती से बने लखपति

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गयाजी: बिहार के खंजाहांपुर गांव में ब्रोकली की खेती ने किसानों की किस्मत बदल दी है। कम लागत में ज्यादा मुनाफा मिलने के कारण अब लगभग 100 किसान इस विदेशी सब्जी की खेती कर रहे हैं। आसपास के गांवों में भी किसान इसे अपनाने लगे हैं।
छप्परफाड़ मुनाफा: उमेश कुमार बताते हैं कि उन्होंने 5 कट्ठे में ब्रोकली की खेती शुरू की थी, जिसमें उन्हें शानदार मुनाफा मिला। एक कट्ठे में लगभग 600-700 ब्रोकली उगती हैं, वजन 6-7 क्विंटल तक होता है। एक ब्रोकली की कीमत 20 से 50 रुपये तक जाती है। इससे किसान का निवेश 1 रुपया और मुनाफा 20 रुपये के अनुपात में निकलता है।
"एक एकड़ में करीब 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा होता है। इससे किसान लखपति बन रहे हैं और खेती का विस्तार कर रहे हैं।" – उमेश कुमार, किसान
ब्रोकली वाला गांव: पहले इस गांव में फूल गोभी और पत्ता गोभी की खेती होती थी, लेकिन स्वाद और डिमांड के कारण ब्रोकली ने जगह बना ली। अब खंजाहांपुर को ‘ब्रोकली वाला गांव’ के नाम से भी जाना जाता है।
ब्रोकली की शुरुआत बोधगया से: कुछ साल पहले बोधगया में मोनेस्ट्री द्वारा बीज उपलब्ध कराए गए थे। इसके बाद खंजाहांपुर के किसानों ने इसे अपनाया। किसान संजय कुमार बताते हैं कि विदेशों में इसकी डिमांड अधिक थी, अब बिहार में भी लोग इसे पसंद करने लगे हैं।
सप्लाई कम, डिमांड अधिक: संजय कुमार कहते हैं कि गया, झारखंड और टाटा तक इसकी डिमांड रहती है। कम लागत और अधिक मुनाफे की वजह से किसान इसे बड़े पैमाने पर उगाना चाहते हैं।
स्वास्थ्य लाभ: जिले के मानपुर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि ब्रोकली में फाइबर, विटामिन C, K, A, B कॉम्प्लेक्स और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में होते हैं। यह पाचन, वजन नियंत्रण, इम्यूनिटी और आंखों की रोशनी के लिए फायदेमंद है। कैंसर जैसे रोगों के जोखिम को भी कम करता है।
"ब्रोकली का सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है, लेकिन गर्भवती महिलाओं और थायराइड के मरीज इसे सीमित मात्रा में लें।" – डॉ. राकेश कुमार, कृषि वैज्ञानिक

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