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आरएसएस शताब्दी वर्ष पर बड़े संगठनात्मक बदलाव के संकेत: प्रांत प्रचारक पद होगा समाप्त

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नई दिल्ली: इस साल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर रहा है। शताब्दी वर्ष के अवसर पर संगठन अपने ढांचे में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है, जिससे कार्यप्रणाली और समन्वय दोनों बेहतर होंगे।
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित बदलावों में सबसे बड़ा बदलाव प्रांत प्रचारक पद का समाप्त होना है। अब तक संघ की प्रांतीय इकाइयों के लिए प्रांत प्रचारक नियुक्त होते थे, लेकिन नई व्यवस्था में यह पद हट सकता है।
राज्य प्रचारक और संभाग प्रचारक होंगे नए जिम्मेदार
नई संरचना के अनुसार, हर राज्य के लिए एक राज्य प्रचारक नियुक्त किया जाएगा, जो पूरे राज्य की जिम्मेदारी संभालेगा। इसके अधीन संभाग प्रचारक होंगे, जो कमिश्नरी या डिविजन स्तर पर राज्य प्रचारक के मार्गदर्शन में काम करेंगे। इसका उद्देश्य कार्यक्षेत्र को छोटा रखना और समन्वय बढ़ाना है।
क्षेत्र प्रचारकों की संख्या घटेगी
वर्तमान में 11 क्षेत्र प्रचारक हैं, जिन्हें घटाकर 9 किया जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर संभाग प्रचारक नियुक्त होंगे, पूरे देश में 75 से अधिक संभाग प्रचारक होंगे।
उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का उदाहरण:
उत्तर प्रदेश में अभी छह प्रांत हैं – ब्रज, अवध, कानपुर, मेरठ, गोरखपुर और काशी, जिनमें कुल 6-7 प्रांत प्रचारक हैं। नई व्यवस्था में अब केवल एक राज्य प्रचारक होगा। उत्तर प्रदेश के 18 मंडलों के लिए 9 संभाग प्रचारक नियुक्त होंगे। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लिए एक ही क्षेत्र प्रचारक होगा, जबकि अभी वे अलग-अलग हैं।
उद्देश्य:
संघ का यह बदलाव कार्यकुशलता बढ़ाने, विस्तार को आसान बनाने और राज्य स्तर पर बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। नई प्रणाली के लागू होने की संभावना मार्च 2026 बताई जा रही है।

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