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दिल्ली का फेफड़ा माने जाने वाले अरावली को बचाने के लिए सड़कों पर उतरी माले

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अमरदीप नारायण प्रसाद

समस्तीपुर में पैदल मार्च, जल-जंगल-जमीन बचाने का किया आह्वान


समस्तीपुर / बिहार :दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों को प्रदूषण से बचाने में अहम भूमिका निभाने वाली अरावली पहाड़ियों को बचाने की मांग को लेकर रविवार को भाकपा (माले) की ओर से समस्तीपुर शहर में अरावली बचाओ मार्च निकाला गया। पार्टी के झंडे और बैनर तले यह पैदल मार्च मालगोदाम चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख बाजारों से गुजरते हुए स्टेशन चौक पहुँचा, जहाँ एक जनसभा का आयोजन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए माले नेताओं और कार्यकर्ताओं ने अरावली पहाड़ को “दिल्ली का फेफड़ा” बताते हुए कहा कि इसे योजनाबद्ध तरीके से कॉरपोरेट घरानों, खासकर अडानी-अंबानी जैसे बड़े पूंजीपतियों के हाथों सौंपने की साजिश की जा रही है। उन्होंने जल-जंगल-जमीन की अंधाधुंध बिक्री और कटाई पर तत्काल रोक लगाने की मांग की।
माले नेताओं ने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में देशभर में जंगलों की कटाई और प्राकृतिक संसाधनों की लूट लगातार बढ़ी है। एक ओर सरकार “माँ के नाम एक पौधा” जैसे अभियान चलाती है, वहीं दूसरी ओर लाखों पेड़ों वाले जंगल उद्योग और फैक्ट्रियों के लिए कौड़ियों के भाव बेच दिए जा रहे हैं।
वक्ताओं ने कहा कि देश पहले से ही हरित क्षेत्र और पेड़-पौधों की भारी कमी से जूझ रहा है, लेकिन बीते दस वर्षों में सरकार की नीतियाँ ऐसी रही हैं, मानो प्रकृति को ही दुश्मन समझकर जल-जंगल-जमीन को नष्ट किया जा रहा हो। इसका सीधा असर पर्यावरण, जलवायु और आम लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
सभा में मौजूद नेताओं ने कहा कि अरावली का विनाश केवल दिल्ली या हरियाणा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह पूरे देश के पर्यावरण संतुलन से जुड़ा गंभीर सवाल है। अगर अभी भी जनआंदोलन खड़ा नहीं हुआ, तो आने वाली पीढ़ियों को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।
भाकपा (माले) ने आम जनता, युवाओं और पर्यावरण प्रेमियों से अपील की कि वे आगे आकर अरावली समेत देशभर में जल-जंगल-जमीन को बचाने के लिए संघर्ष तेज करें और सरकार की जनविरोधी व पर्यावरण विरोधी नीतियों का विरोध करें।

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