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भूमि विवाद की आग में झुलसता बिहार

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कार्रवाई की तलवार सिर्फ CO पर, SDO–DM स्तर की राजस्व सुनवाई क्यों ठप?

पटना।बिहार में भूमि विवाद अब केवल जमीन का सवाल नहीं रह गया है। यह शांति, कानून-व्यवस्था और प्रशासन पर भरोसे की लड़ाई बन चुका है। हर जिले में हजारों लोग वर्षों से जमीन से जुड़े मामलों में भटक रहे हैं, लेकिन समाधान की राह अजीब तरह से अंचल कार्यालय (CO) पर जाकर ठहर जाती है।
राजस्व कानूनों के तहत व्यवस्था बिल्कुल स्पष्ट है। यदि फरियादी को अंचल स्तर से राहत नहीं मिलती, तो SDO स्तर पर राजस्व न्यायालय और इसके बाद DM स्तर पर भूमि विवाद से जुड़े राजस्व मामलों में सुनवाई और निपटारा का प्रावधान है।

लेकिन हकीकत यह है कि:

SDO स्तर पर नियमित सुनवाई नहीं हो रही।
DM स्तर पर प्रभावी हस्तक्षेप नहीं दिख रहा।
DC/LR के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के कारण आदेश लागू करना मुश्किल।

जनता महीनों-बरसों तक न्याय के लिए भटकती रहती है।

डिप्टी सीएम और राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा लगातार जन संवाद कार्यक्रमों में भ्रष्ट अंचल अधिकारियों पर कार्रवाई का संदेश देते रहे हैं। इसमें कोई दो राय नहीं कि अंचल कार्यालयों में भ्रष्टाचार गहरी जड़ें जमा चुका है।
मगर भूमि विवाद जैसी जटिल समस्या को केवल CO स्तर की गड़बड़ी बताना आधा सच है।

जब अधिकार हैं, तो निष्क्रियता क्यों?

राजस्व कानूनों ने निम्न अधिकार SDO और DM को दिए हैं:
SDO: दाखिल-खारिज, बंटवारा, रिकॉर्ड सुधार, अपील और राजस्व वादों का निपटारा।
DM: रोक सूची का प्रबंधन, अवैध कब्जे पर कार्रवाई, भूमि विवाद से उपजे तनाव पर नियंत्रण और त्वरित प्रशासनिक हस्तक्षेप।
फिर भी, राजस्व न्यायिक शक्तियों के बावजूद मामलों का समयबद्ध समाधान नहीं हो रहा। फरियादी महीनों-बरसों तक आदेश की प्रतीक्षा करता रहता है, जबकि विवाद बढ़कर सामाजिक टकराव और हिंसा तक पहुंच जाता है।

राजस्व सेवा के अधिकारी बताते हैं कि यदि:

SDO स्तर पर नियमित सुनवाई हो
DM स्तर पर लंबित भूमि विवादों की समीक्षा और त्वरित निपटारा हो
तो जमीन से जुड़े विवादों का बोझ स्वतः कम हो सकता है। लेकिन फिलहाल तस्वीर यह है कि ऊपरी राजस्व स्तर पर जिम्मेदारी तय करने से परहेज किया जा रहा है, और कार्रवाई की तलवार सिर्फ CO तक सीमित रह जाती है।

समस्या कहाँ है?

SDO स्तर पर सुनवाई ठप → मामले लंबित रह जाते हैं।
DC स्तर पर हस्तक्षेप कमजोर → विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है।
DC/LR के रिकॉर्ड में गड़बड़ी → आदेश लागू करना मुश्किल।
जनता की पीड़ा → लोग महीनों, सालों तक न्याय के लिए भटकते हैं।

राजनीति बनाम प्रशासनिक सच्चाई

भूमि विवाद पर एकतरफा कार्रवाई का यह तरीका अब राजनीतिक संदेश ज्यादा और प्रशासनिक समाधान कम दिखने लगा है। सवाल यह नहीं कि CO पर कार्रवाई हो या नहीं—सवाल यह है कि:
SDO और DM स्तर पर राजस्व न्यायिक दायित्वों की समीक्षा कब होगी?
लंबित मामलों का निपटारा कब समयबद्ध होगा?
नतीजा क्या निकल रहा है?
आम आदमी को त्वरित न्याय नहीं मिल रहा।
विवाद लटकते जा रहे हैं।
प्रशासनिक भरोसा कमजोर पड़ रहा है।
अब प्रदेश पूछ रहा है—
क्या भूमि विवाद का समाधान सिर्फ निचले पायदान पर बलि चढ़ाकर होगा, या ऊपर तक जिम्मेदारी तय की जाएगी?

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