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2026 में सिगरेट पीना बन सकता है ‘लक्ज़री’, एक कश पर चुकाने पड़ सकते हैं 70 रुपये से ज्यादा

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नई दिल्ली।अब तक सिगरेट को सेहत के लिए खतरनाक माना जाता था, लेकिन आने वाले समय में यह जेब के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है। खासकर कम आय वर्ग के लोगों के लिए सिगरेट पीना अब महंगा शौक बनने वाला है। वर्ष 2026 से सिगरेट की कीमतों में ऐसी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे एक सिगरेट की कीमत 70 रुपये से अधिक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है।
दरअसल, संसद ने Central Excise (Amendment) Bill, 2025 को मंजूरी दे दी है। यह विधेयक राज्यसभा से पारित होकर लोकसभा में लौटा है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा पेश किए गए इस बिल में सिगरेट समेत सभी तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी और सेस में भारी इजाफे का प्रावधान किया गया है।
सरकार का तर्क है कि तंबाकू उत्पादों की कीमतें बढ़ने से युवा और छात्र वर्ग धूम्रपान से दूर रहेगा, सिगरेट छोड़ने वालों की संख्या बढ़ेगी और बीमारियों पर होने वाला सरकारी व पारिवारिक खर्च कम होगा।
नए प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार, जो सिगरेट अभी करीब 18 रुपये प्रति स्टिक में मिलती है, उसकी कीमत बढ़कर 72 रुपये प्रति सिगरेट तक पहुंच सकती है। यानी एक सिगरेट पर सीधे 54 रुपये की बढ़ोतरी संभव है। इन नई दरों को वर्ष 2026 से लागू किए जाने की तैयारी है।
मौजूदा कानून Central Excise Act, 1944 के तहत सिगरेट पर ड्यूटी 200 से 735 रुपये प्रति 1000 सिगरेट थी। लेकिन संशोधन के बाद इसे बढ़ाकर 2,700 से 11,000 रुपये प्रति 1000 सिगरेट करने का प्रस्ताव है। इसी कारण खुदरा बाजार में सिगरेट की कीमतें चार गुना तक बढ़ सकती हैं।
यह बिल सिर्फ सिगरेट तक सीमित नहीं है। सरकार ने अन्य तंबाकू उत्पादों पर भी कर का भारी बोझ डालने की तैयारी कर ली है।
च्युइंग तंबाकू पर टैक्स 25% से बढ़कर 100%
हुक्का तंबाकू पर 25% से बढ़कर 40%
पाइप और स्मोकिंग मिक्सचर पर 60% से बढ़कर 325%
इसके अलावा जर्दा, सुगंधित तंबाकू और सिगार भी इस दायरे में लाए जाएंगे।
कुल मिलाकर सरकार का संदेश साफ है— या तो सिगरेट छोड़िए, या फिर भारी कीमत चुकाने के लिए तैयार रहिए।

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