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साल 2025: बिहार में अपराध और सुरक्षा की बड़ी चुनौती

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गोपाल खेमका हत्याकांड से लेकर दुलारचंद तक, क्राइम विशेषज्ञों के अनुसार अपराध नियंत्रण सरकार की सबसे बड़ी चुनौती

पटना: बिहार में अपराध नियंत्रण किसी भी सरकार के लिए हमेशा चुनौती रहा है। साल 2025 में राज्य में कई आपराधिक घटनाएँ हुईं, जिनमें व्यवसायियों, पत्रकारों और आम नागरिकों पर हमले शामिल हैं। इन घटनाओं ने न केवल राज्य बल्कि पूरे देश का ध्यान बिहार की सुरक्षा व्यवस्थाओं की ओर खींचा।

राज्य में अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी गृह मंत्री सम्राट चौधरी के कंधों पर है और सरकार ने कई योजनाओं और अभियानों की शुरुआत की है। विशेषज्ञों के अनुसार, अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावी निगरानी और जनता-पुलिस सहयोग भी जरूरी है।

गोपाल खेमका हत्याकांड: राज्य को झकझोरने वाला मामला

पटना के चर्चित व्यवसायी और बीजेपी से जुड़े गोपाल खेमका की 4 जुलाई 2025 को हत्या कर दी गई। अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी, जिससे पूरे राज्य में हड़कंप मच गया। पुलिस ने SIT का गठन किया और आरोपी पकड़े गए, लेकिन हत्या के पीछे की असली वजह आज तक स्पष्ट नहीं हो पाई।

बिहार में हत्या की भयावह दर

एससीईआरबी के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी से जून 2025 के बीच बिहार में 1376 हत्याएँ दर्ज हुईं। यानी राज्य में औसतन हर महीने 229 हत्याएँ और प्रतिदिन करीब 7 लोगों की हत्या होती है।

अन्य प्रमुख घटनाएँ

गया सामूहिक दुष्कर्म मामला: मार्च 2025 में महिला होमगार्ड के साथ एंबुलेंस में सामूहिक दुष्कर्म की घटना हुई। इस मामले ने राज्य भर में विरोध प्रदर्शन और प्रशासनिक सवाल खड़े किए।

45 दिन बाद हत्या: अप्रैल 2025 में पटना में विवाह के 45 दिन बाद व्यवसायी की हत्या करवा दी गई।

अस्पताल में अपराधी हत्या: जुलाई 2025 में पटना के पारस हॉस्पिटल में पुलिस हिरासत में अपराधी चंदन मिश्रा की हत्या। घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

पत्रकार व शिक्षक हत्याएँ: जुलाई और अक्टूबर 2025 में मुजफ्फरपुर और छपरा में पत्रकार और शिक्षक की हत्या की गई।

राजनीतिक हिंसा: विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व विधायक अनंत सिंह विवादों में आए और दुलारचंद यादव की हत्या हुई।

विशेषज्ञों की राय

क्राइम एनालिस्ट डॉ. रवि वर्मा कहते हैं:

"बिहार में अपराध की घटनाओं में वृद्धि का मुख्य कारण निगरानी की कमजोर व्यवस्था, पुलिस संसाधनों की कमी और स्थानीय प्रशासन की धीमी प्रतिक्रिया है। केवल कड़ी कार्रवाई से ही अपराध नियंत्रण संभव नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी और जनता-सहयोग भी जरूरी है।"

सुरक्षा विशेषज्ञ अमिताभ त्रिपाठी का कहना है:

"ऑपरेशन लंगड़ा जैसे अभियान असर डालते हैं, लेकिन इन्हें लगातार और व्यापक स्तर पर लागू करना आवश्यक है। पुलिस को जनता तक पहुँचने वाले निर्भीक दरबार लगाने चाहिए और भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए।"

पुलिस की प्रतिक्रिया

एडीजी (विधि व्यवस्था) पंकज दराद ने कहा कि 2025 में पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ अभियान चलाया और बड़ी संख्या में अपराधियों को सजा दिलाई। उन्होंने बताया:

"आने वाले दिनों में पुलिस अभियान जारी रखेगी और भ्रष्टाचार के मामलों में भी कार्रवाई होगी। थाना में जनता दरबार लगाए जा रहे हैं ताकि नागरिकों की शिकायतें तुरंत सुनी और निपटाई जा सकें।"

निष्कर्ष

विशेषज्ञों और अधिकारियों की राय के आधार पर यह स्पष्ट है कि बिहार में अपराध नियंत्रण केवल कानून और दंड तक सीमित नहीं रह सकता। मजबूत निगरानी, तकनीकी सहयोग और जनता-पुलिस संवाद को बढ़ाना आवश्यक है।

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