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तृणमूल कांग्रेस का 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज चुनाव आयुक्त से करेगा मुलाकात

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कोलकाता/नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में अगले साल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजनीति गर्म हो गई है। इस बीच, तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने आज 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मिलने के लिए भेजा है।

बैठक का उद्देश्य

प्रतिनिधिमंडल की यह मुलाकात राज्य में स्पेशल गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) के अंतिम चरण के बीच हो रही है। टीएमसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में लाखों वोटर्स के नाम बिना उचित सूचना और पारदर्शिता के हटाए गए हैं। प्रतिनिधिमंडल आयोग से यह मांग करेगा कि हटाए गए नामों और “तार्किक विसंगति” कैटेगरी के तहत लगाए गए लेबल के पीछे की प्रक्रिया और कानूनी आधार को स्पष्ट किया जाए।

प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्य

टीएमसी के इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं:
राज्यसभा पार्टी चीफ व्हिप मोहम्मद नदीमुल हक
सांसद डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी, ममता ठाकुर, साकेत गोखले, रीताब्रत बनर्जी
पार्टी नेता प्रदीप मजूमदार, चंद्रिमा भट्टाचार्य, मानस भुनिया

वोटर लिस्ट में विवाद

जानकारी के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान लगभग 58.2 लाख नामों को हटाया गया। मुख्य चुनाव आयुक्त ने 16 दिसंबर को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की थी। वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने या हटवाने की अंतिम तारीख 15 जनवरी, 2026 तक है। फाइनल मतदाता सूची 14 फरवरी, 2026 को प्रकाशित की जाएगी।

टीएमसी का आरोप

टीएमसी ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया है कि SIR अभियान के जरिए बीजेपी की ‘बी टीम’ ने चुनावी प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया। पार्टी ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया और कहा कि हटाए गए वोटर्स की पूरी सूची स्पष्ट और विधानसभा क्षेत्र अनुसार प्रकाशित की जानी चाहिए।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले यह मामला केंद्रीय चुनाव आयोग और राज्य सरकार के बीच खींचतान की स्थिति को और बढ़ा सकता है। टीएमसी लगातार चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाती रही है और वोटर लिस्ट की पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग कर रही है।

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