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निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर जेडीयू में हलचल, पार्टी कार्यालय के बाहर लगे पोस्टर

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पटना:बिहार की राजनीति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को लेकर चल रही अटकलें एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। लंबे समय से उनकी संभावित राजनीतिक भूमिका को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन नए साल की पूर्व संध्या पर राजधानी पटना में लगे एक पोस्टर ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

जेडीयू कार्यालय के बाहर दिखा पोस्टर

31 दिसंबर को जनता दल यूनाइटेड के प्रदेश कार्यालय के बाहर एक पोस्टर लगाया गया, जिसमें निशांत कुमार को राजनीति में सक्रिय भूमिका देने की मांग की गई है। पोस्टर में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया है कि पार्टी और बिहार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए नई पीढ़ी को जिम्मेदारी सौंपी जाए।

पोस्टर के संदेश ने खींचा ध्यान

पोस्टर में नए साल को “नई शुरुआत” बताते हुए निशांत कुमार को पार्टी की भावी जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई है। इसमें यह भी संकेत दिया गया है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सुरक्षित है और अब अगली पीढ़ी को आगे लाने का समय आ गया है।

कौन है पोस्टर लगाने वाला नेता

खुद को ‘नीतीश सेवक’ बताने वाले जेडीयू नेता कृष्णा पटेल ने यह पोस्टर लगाया है। वे छात्र जेडीयू के प्रदेश उपाध्यक्ष हैं और इससे पहले भी कई बार निशांत कुमार को राजनीति में लाने की मांग सार्वजनिक रूप से कर चुके हैं।

पहले भी उठ चुकी है मांग

निशांत कुमार को सक्रिय राजनीति में लाने की मांग नई नहीं है। हाल ही में जेडीयू के कुछ कार्यकर्ताओं ने पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर भूख हड़ताल कर पार्टी नेतृत्व से इस दिशा में फैसला लेने की अपील की थी। उनका कहना था कि पार्टी को भविष्य की राजनीति के लिए अभी से तैयार करना जरूरी है।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की राय

जेडीयू के कुछ वरिष्ठ नेता भी इस मुद्दे पर खुलकर अपनी राय रख चुके हैं। नालंदा से आने वाले मंत्री श्रवण कुमार सहित कई नेताओं ने यह स्वीकार किया है कि संगठन के भीतर निशांत कुमार को लेकर चर्चा होती रहती है। वहीं राष्ट्रीय नेतृत्व से जुड़े कुछ नेताओं ने भी संकेत दिया है कि कार्यकर्ताओं की भावनाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

नीतीश कुमार की चुप्पी बरकरार

इन तमाम चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ओर से अब तक कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिला है। वे लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में परिवारवाद के खिलाफ मुखर रहे हैं और इसी आधार पर वे अपने राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते रहे हैं। ऐसे में निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

आने वाले दिनों पर टिकी निगाहें

पोस्टर और कार्यकर्ताओं की मांग के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक गलियारों में गरम हो गया है। हालांकि अंतिम फैसला क्या होगा, यह पूरी तरह नीतीश कुमार के रुख पर निर्भर करता है। फिलहाल, निशांत कुमार की राजनीतिक भूमिका को लेकर जेडीयू में अंदरखाने चर्चा तेज होती दिख रही है।

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