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रेलवे परीक्षा में हिजाब को लेकर विवाद, भावनगर में परीक्षार्थी को रोके जाने का आरोप

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भावनगर (गुजरात):गुजरात के भावनगर जिले में रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा के दौरान एक मुस्लिम छात्रा के साथ कथित भेदभाव का मामला सामने आया है। हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुंची छात्रा को परीक्षा केंद्र पर रोक दिए जाने के बाद यह मामला तूल पकड़ता जा रहा है। अब इस पूरे प्रकरण को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने प्रशासन से शिकायत कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

परीक्षा केंद्र पर हुआ विवाद

यह घटना 24 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है, जब रेलवे भर्ती बोर्ड की परीक्षा भावनगर के तरासामिया क्षेत्र स्थित सरकारी स्कूल में आयोजित की गई थी। छात्रा परीक्षा केंद्र पर निर्धारित समय से पहुंची थी, लेकिन आरोप है कि केंद्र पर तैनात निरीक्षकों ने उससे हिजाब हटाने को कहा।

महिला निरीक्षक से जांच की पेशकश

छात्रा ने निरीक्षकों से कहा कि वह अपनी पहचान की जांच महिला कर्मचारी द्वारा कराए जाने को तैयार है, लेकिन किसी पुरुष के सामने हिजाब हटाना उसके लिए संभव नहीं है। इसके बावजूद, आरोप है कि निरीक्षकों ने उसकी बात नहीं मानी और उसे परीक्षा में शामिल होने से रोक दिया।

जमीयत उलेमा-ए-हिंद का हस्तक्षेप

इस मामले को लेकर जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने भावनगर के एडिशनल कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। संगठन का कहना है कि छात्रा ने किसी भी तरह से परीक्षा प्रक्रिया में बाधा नहीं डाली और सहयोग की भावना दिखाई, इसके बावजूद उसे अपमानजनक स्थिति का सामना करना पड़ा।

अभद्र भाषा के आरोप

संगठन ने आरोप लगाया है कि निरीक्षक ने छात्रा से आपत्तिजनक और असंवेदनशील भाषा में बात की। शिकायत में यह भी कहा गया है कि छात्रा को यह कहकर हतोत्साहित किया गया कि “तुम जैसे लोग परीक्षा न दें तो बेहतर है।” जमीयत ने इस बयान को गंभीर मानते हुए सीसीटीवी फुटेज की जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

धार्मिक स्वतंत्रता पर सवाल

जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने प्रशासन से यह भी अपील की है कि भविष्य में किसी भी परीक्षार्थी के साथ धर्म, भाषा, जाति या पहनावे के आधार पर भेदभाव न हो। संगठन ने कहा कि देश के संविधान में धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार दिया गया है और परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसरों पर इसका सम्मान किया जाना चाहिए।

पहले से मौजूद दिशा-निर्देश

गौरतलब है कि इससे पहले कई परीक्षा बोर्ड और सरकारी एजेंसियां यह स्पष्ट कर चुकी हैं कि धार्मिक प्रतीकों जैसे हिजाब की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते पहचान की जांच गोपनीय तरीके से और महिला कर्मचारियों द्वारा की जाए।

अब तक आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं

इस पूरे मामले पर फिलहाल न तो रेलवे भर्ती बोर्ड की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने आया है और न ही गुजरात पुलिस ने कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया दी है। प्रशासनिक स्तर पर शिकायत मिलने के बाद अब जांच की प्रक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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