प्रदीप नारायण प्रसाद समस्तीपुर
समस्तीपुर (रोसड़ा):समस्तीपुर जिले के रोसड़ा अंचल से सामने आया यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है, बल्कि यह भी उजागर करता है कि कैसे ऐतिहासिक और धार्मिक संस्थानों की जमीनें सुनियोजित साजिश के तहत हड़पी जा रही हैं। करीब 500 वर्ष पुराने रोसड़ा कबीर मठ की बहुमूल्य जमीन में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े का सनसनीखेज आरोप लगा है।
आरोप है कि मठ की कुल 13 बीघा जमीन में से करीब 3 बीघा जमीन रजिस्टर-2 में हेराफेरी कर भूमाफियाओं के नाम दर्ज कर दी गई और उसके नाम से दाखिल-खारिज भी कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस जमीन का मौजूदा बाजार मूल्य करीब 500 करोड़ रुपये है।
गंभीर आरोप यह भी है कि यह पूरा खेल अंचल कार्यालय की मिलीभगत से अंजाम दिया गया और रोसड़ा अंचल में बिना लेन-देन के कोई काम नहीं होने की चर्चाओं को यह मामला और पुख्ता करता है।
कम्युनिस्ट पार्टी का उग्र विरोध,
अंचलाधिकारी का अर्थी जुलूस
इस कथित भूमि घोटाले के विरोध में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को रोसड़ा में अंचलाधिकारी का प्रतीकात्मक अर्थी जुलूस निकाला। प्रदर्शनकारियों ने जोरदार नारेबाजी करते हुए आरोप लगाया कि अंचलाधिकारी ने भूमाफियाओं से साठगांठ कर कबीर मठ की जमीन को हड़पने में अहम भूमिका निभाई है।
माकपा नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि मठ की जमीन को तुरंत भूमाफियाओं के कब्जे से मुक्त नहीं कराया गया और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दिशा समिति की बैठक में उठा मामला, तब हरकत में आया प्रशासन
यह मामला तब खुलकर सामने आया जब बिहार सरकार के पूर्व मंत्री व कल्याणपुर विधायक महेश्वर हजारी ने दिशा समिति की बैठक में इस जमीन घोटाले को जोरदार तरीके से उठाया।
इस दौरान रोसड़ा विधायक वीरेंद्र पासवान ने भी पूरे मामले का समर्थन किया।
मामला उठते ही जिला प्रशासन पर दबाव बढ़ा और आखिरकार डीएम रोशन कुशवाहा को जांच समिति गठित करनी पड़ी।
चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित, भू-माफियाओं में हड़कंप
डीएम ने भूमि उप-समाहर्ता ब्रजेश कुमार के नेतृत्व में चार सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है। जांच की घोषणा के बाद भूमाफियाओं और कथित रूप से शामिल अंचल कर्मियों में हड़कंप मच गया है।
सूत्रों का दावा है कि रोसड़ा अंचल के कई कर्मी और पदाधिकारी सीधे तौर पर इस खेल में शामिल रहे हैं, जिन पर अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
2022 में भी हुई थी जांच, फिर क्यों दबा दिया गया मामला?
यह मामला नया नहीं है। वर्ष 2022 में मठ प्रबंधन की शिकायत पर तत्कालीन अपर समाहर्ता ने जांच रिपोर्ट दी थी, लेकिन न तो किसी पर कार्रवाई हुई और न ही जमीन को सुरक्षित किया गया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर किसके संरक्षण में उस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया?
मठ की जमीन पर होटल! लीज शर्तों का खुला उल्लंघन
जानकारी के अनुसार कबीर मठ की यह जमीन पहले आयुर्वेद कॉलेज के लिए लीज पर दी गई थी, लेकिन नियमों को ताक पर रखकर वहां होटल तक खोल दिया गया।
यह सीधे-सीधे धार्मिक न्यास की संपत्ति का दुरुपयोग है, जो बिना प्रशासनिक संरक्षण के संभव नहीं माना जा रहा।
पूर्व सांसद प्रतिनिधि ने सौंपे दस्तावेज
पूर्व सांसद प्रतिनिधि रविंद्र नाथ सिंह ने इस पूरे फर्जीवाड़े से जुड़े दस्तावेजों के साथ डीएम, राज्य के भूमि सुधार मंत्री और अन्य वरीय अधिकारियों को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
जनप्रतिनिधियों का सीधा आरोप
पूर्व मंत्री महेश्वर हजारी ने साफ कहा कि“रजिस्टर-2 में ओवरराइटिंग कर जानबूझकर जमीन का रिकॉर्ड बदला गया है, जो बिना अंचल कर्मियों की मिलीभगत के संभव नहीं है।”
वहीं रोसड़ा विधायक वीरेंद्र कुमार ने कहा कि यह भूमाफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों का संगठित खेल है और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
डीएम का बयान, लेकिन जनता को कार्रवाई का इंतजार
डीएम रोशन कुशवाहा ने कहा है कि जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी और किसी को बख्शा नहीं जाएगा।
हालांकि मठ से जुड़े लोग और जिले की जनता पूछ रही है कि क्या इस बार सच में बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई होगी या मामला फिर फाइलों में दबा दिया जाएगा?
सीधे सवाल
▪ क्या रोसड़ा अंचल बिना घूस के कोई काम करता है?
▪ क्या रजिस्टर-2 में इतनी बड़ी हेराफेरी अंचलाधिकारी की जानकारी के बिना संभव है?
▪ 2022 की जांच रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
अब सबकी निगाहें जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं।
अगर इस बार भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह साफ हो जाएगा कि समस्तीपुर में भू-माफियाओं के आगे प्रशासन नतमस्तक है।