पटना:बिहार पुलिस के कार्यवाहक महानिदेशक रह चुके वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आलोक राज (1989 बैच) बुधवार, 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो गए। इस अवसर पर पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम में बिहार के पुलिस महानिदेशक विनय कुमार ने उन्हें पारंपरिक सम्मान के साथ विदाई दी।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में आलोक राज को बिहार पुलिस का कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त किया गया था। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद विनय कुमार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक का पदभार ग्रहण किया।
सेवा काल में पुलिस व्यवस्था में आए बदलाव को करीब से देखा
सेवानिवृत्ति के अवसर पर अपने संबोधन में आलोक राज ने कहा कि
“36 वर्ष 4 महीने की सेवा के दौरान बिहार पुलिस के स्वरूप में व्यापक बदलाव देखने को मिले हैं।
सेवा के शुरुआती दिनों में जहां संसाधनों की कमी थी, वहीं आज बिहार पुलिस आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रशिक्षण और उन्नत हथियारों से सुसज्जित एक वैज्ञानिक एवं पेशेवर पुलिस बल बन चुकी है।”
उन्होंने बिहार पुलिस को देश के प्रमुख और सक्षम पुलिस तंत्रों में से एक बताया।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि और प्रारंभिक सेवा
आलोक राज का गृह जिला मुजफ्फरपुर (बिहार) है। उनके पिता परमेश्वर प्रसाद तथा माता स्वर्गीय प्रो. कृष्णा वाला थीं।
वे पटना विश्वविद्यालय से भूगर्भशास्त्र में एमएससी के गोल्ड मेडलिस्ट रहे हैं।
वर्ष 1989 में भारतीय पुलिस सेवा में चयन के बाद उन्होंने पटना सिटी में सहायक पुलिस अधीक्षक के रूप में अपने कैरियर की शुरुआत की।
जिला पुलिस से केंद्रीय बल तक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां
अपने लंबे सेवाकाल के दौरान आलोक राज ने
रांची, गुमला, पश्चिमी सिंहभूम, देवघर, हजारीबाग, सीतामढ़ी और बेगूसराय जिलों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया।
वर्ष 2004 से 2011 तक वे केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) में प्रतिनियुक्ति पर रहे। इस दौरान उन्हें चार बार महानिदेशक, सीआरपीएफ का प्रशंसा डिस्क प्रदान किया गया।
बिहार लौटने के बाद उन्होंने
अपर पुलिस महानिदेशक (विधि-व्यवस्था),
अपर पुलिस महानिदेशक (विशेष शाखा),
अपर पुलिस महानिदेशक (सीआईडी),
महानिदेशक (प्रशिक्षण),
महानिदेशक (बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस),
महानिदेशक (निगरानी अन्वेषण ब्यूरो)
सहित कई अहम पदों पर कार्य किया।
वीरता और विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रीय सम्मान
आलोक राज को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए तीन बार राष्ट्रपति पदक से सम्मानित किया गया।
वर्ष 1994 में उन्हें पुलिस वीरता पदक,
वर्ष 2008 में सराहनीय सेवा पदक
और वर्ष 2016 में विशिष्ट सेवा पदक प्रदान किया गया।
इसके अतिरिक्त वर्ष 2019 में उन्हें अटल रत्न सम्मान से भी नवाजा गया।
अपराध और नक्सलवाद के विरुद्ध प्रभावी भूमिका
कैरियर के शुरुआती दौर में पटना सिटी में चार कुख्यात अपराधियों के विरुद्ध कार्रवाई,
पश्चिमी सिंहभूम में वन माफिया,
और हजारीबाग में कोयला माफिया एवं नक्सलियों के खिलाफ अभियानों के लिए वे विशेष रूप से चर्चित रहे।
सीआरपीएफ में रहते हुए उन्होंने झारखंड और पश्चिम बंगाल में नक्सल विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। नंदीग्राम में कानून-व्यवस्था बहाल करने में उनकी भूमिका की व्यापक सराहना हुई।
अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण
आलोक राज को संयुक्त राष्ट्र संघ की शांति सेना के लिए चुना गया था। उन्होंने इटली में संयुक्त राष्ट्र शांति सेना का उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया।
36 वर्षों से अधिक के सेवाकाल के बाद आलोक राज ऐसे अधिकारी के रूप में सेवानिवृत्त हुए हैं, जिन्होंने बिहार पुलिस और केंद्रीय बलों में रहते हुए कानून-व्यवस्था, सुरक्षा और पुलिस सुधारों में महत्वपूर्ण योगदान दिया।