पटना: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने वर्ष 2025 में रिकॉर्ड कार्रवाई करते हुए सरकारी महकमे में हलचल मचा दी है। घूसखोरी के मामलों में ब्यूरो ने 107 लोकसेवकों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है, जबकि आय से अधिक संपत्ति मामलों में करोड़ों रुपये की अवैध संपत्ति जब्त की गई है। नए वर्ष 2026 में निगरानी ब्यूरो का फोकस सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दोषियों को समय पर सजा दिलाने पर भी रहेगा।
साल के अंतिम दिन निगरानी ब्यूरो कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए निगरानी ब्यूरो में जल्द ही स्पीडी ट्रायल कोषांग का गठन किया जाएगा। इससे ट्रैप, डीए और पद के दुरुपयोग से जुड़े मामलों में वर्षों लगने वाली कानूनी प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा।
2025 में एफआईआर का टूटा रिकॉर्ड
डीजी गंगवार के अनुसार, वर्ष 2025 में निगरानी ब्यूरो द्वारा कुल 122 एफआईआर दर्ज की गईं। यह पिछले 25 वर्षों के औसत (72–73 एफआईआर प्रति वर्ष) से कहीं अधिक है। खास बात यह रही कि 30 दिसंबर को एक ही दिन में 20 एफआईआर दर्ज की गईं, जो अपने आप में रिकॉर्ड है। पूरे वर्ष के कार्य दिवसों को देखें तो लगभग हर दूसरे दिन एक एफआईआर दर्ज हुई।
ट्रैप मामलों में सबसे बड़ी कार्रवाई
वर्ष 2025 में दर्ज कुल मामलों में 101 एफआईआर ट्रैप से जुड़ी रहीं, जिनमें 107 लोकसेवकों को घूस लेते रंगेहाथ पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में 7 महिला पदाधिकारी और 6 बिचौलिए भी शामिल हैं। इन मामलों में कुल 37 लाख 80 हजार 300 रुपये रिश्वत की राशि जब्त की गई।
डीजी ने बताया कि पिछले वर्ष 2024 में ट्रैप से जुड़े केवल 8 मामले दर्ज हुए थे, जबकि पिछले 25 वर्षों का औसत 47 एफआईआर सालाना रहा है। इस लिहाज से 2025 निगरानी ब्यूरो के इतिहास का सबसे प्रभावी वर्ष रहा।
आय से अधिक संपत्ति मामलों में दोगुनी सख्ती
आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामलों में भी निगरानी की कार्रवाई तेज रही। वर्ष 2025 में 15 लोकसेवकों के खिलाफ डीए के मामले दर्ज किए गए, जबकि 2024 में यह संख्या सिर्फ 2 थी। इन मामलों में अब तक 12 करोड़ 77 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
सबसे बड़ा डीए केस भवन निर्माण विभाग के एक कार्यपालक अभियंता के खिलाफ दर्ज किया गया, जिसमें 2 करोड़ 74 लाख रुपये की अवैध संपत्ति सामने आई है। इसके अलावा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग, ग्रामीण कार्य विभाग और पुलिस महकमे के पदाधिकारियों पर भी कार्रवाई की गई है।
सजा की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी
डीजी गंगवार ने बताया कि पहले निगरानी के मामलों में दोषियों को सजा दिलाने में औसतन 12 से 13 वर्ष लग जाते थे। अब इस देरी को खत्म करने के लिए स्पीडी ट्रायल व्यवस्था लागू की जा रही है। इस कोषांग की जिम्मेदारी डीआईजी स्तर के अधिकारी को सौंपी जाएगी, ताकि मामलों की नियमित मॉनिटरिंग हो सके।
नियोजित शिक्षक घोटाले की जांच जारी
नियोजित शिक्षकों से जुड़े फर्जी प्रमाण पत्र मामलों की जांच भी जारी है। अब तक शिक्षा विभाग की ओर से 6.56 लाख से अधिक प्रमाण पत्र जांच के लिए भेजे गए हैं। इसमें अब तक 1711 एफआईआर दर्ज की जा चुकी है, जिनमें 2916 शिक्षक अभियुक्त बनाए गए हैं। वर्ष 2025 में ही इस मामले में 130 एफआईआर दर्ज की गईं।
निगरानी ब्यूरो के आंकड़े साफ संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई और तेज होगी। वर्ष 2026 में गिरफ्तारी के साथ-साथ दोषियों को जल्द सजा दिलाना सरकार और निगरानी दोनों की प्राथमिकता रहेगी।