नई दिल्ली: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PMDDKY) के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। योजना के तहत चयनित आकांक्षी कृषि जिलों की समीक्षा और निगरानी के लिए विभिन्न केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों को सेंट्रल नोडल ऑफिसर (CNO) के रूप में नियुक्त किया गया है। इन अधिकारियों को योजना की जमीनी प्रगति पर नजर रखने और राज्यों के साथ समन्वय की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने कृषि प्रधान जिलों के लिए सेंट्रल नोडल ऑफिसर की नियुक्ति और कुछ स्थानों पर बदलाव को मंजूरी दी है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी कार्यालय ज्ञापन के अनुसार यह निर्णय पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों और समय-समय पर हुए संशोधनों के अनुरूप लिया गया है।
योजना की निगरानी होगी और सख्त
सरकार का मानना है कि सेंट्रल नोडल ऑफिसर की तैनाती से योजना की मॉनिटरिंग मजबूत होगी। ये अधिकारी जिलों में योजना की प्रगति की समीक्षा करेंगे, तय लक्ष्यों की उपलब्धि का आकलन करेंगे और राज्य व जिला प्रशासन के साथ नियमित समन्वय बनाए रखेंगे। इसके साथ ही, जहां जरूरत होगी वहां सुधारात्मक सुझाव भी देंगे।
छह वर्षों के लिए लागू होगी योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को 2025-26 से छह वर्षों के लिए मंजूरी दी है। इस योजना के तहत देश के 100 कृषि प्रधान जिलों को शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना है।
किन आधारों पर चुने जाएंगे जिले
योजना में शामिल जिलों की पहचान तीन प्रमुख संकेतकों के आधार पर की जाएगी—
कम कृषि उत्पादकता
फसल उत्पादन का कम स्तर
कृषि क्षेत्र में ऋण वितरण की कमी
हर राज्य और केंद्र शासित प्रदेश से कम से कम एक जिले को योजना में शामिल किया जाएगा। जिलों की संख्या का निर्धारण नेट क्रॉप्ड एरिया और ऑपरेशनल होल्डिंग्स के अनुपात के आधार पर किया जाएगा।
36 योजनाओं का होगा समन्वय
PMDDKY के तहत केंद्र सरकार के 11 विभागों की 36 मौजूदा योजनाओं, राज्य सरकारों की योजनाओं और निजी क्षेत्र की स्थानीय भागीदारी को एकीकृत किया जाएगा। इसका मकसद संसाधनों का बेहतर उपयोग कर खेती से जुड़े हर पहलू को मजबूत करना है।
जिला स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक निगरानी
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर समितियों का गठन किया जाएगा। जिला स्तर पर धन-धान्य समिति जिला कृषि कार्ययोजना को अंतिम रूप देगी, जिसमें प्रगतिशील किसान भी शामिल होंगे।
हर जिले में योजना की प्रगति की निगरानी 117 प्रदर्शन संकेतकों वाले डिजिटल डैशबोर्ड के जरिए हर महीने की जाएगी। नीति आयोग जिला योजनाओं की समीक्षा और मार्गदर्शन की भूमिका निभाएगा, जबकि सेंट्रल नोडल ऑफिसर नियमित तौर पर फील्ड स्तर की रिपोर्ट तैयार करेंगे।
आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में कदम
सरकार का दावा है कि इस योजना से खेती और उससे जुड़े क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ेगी, वैल्यू एडिशन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके साथ ही घरेलू उत्पादन को मजबूती मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को गति मिलेगी।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के जरिए केंद्र सरकार का फोकस साफ है—कमजोर कृषि जिलों को मजबूत कर राष्ट्रीय स्तर पर कृषि प्रदर्शन को नई ऊंचाई तक पहुंचाना।