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बिहार में नया साल और नया नियम: गाड़ियों की फिटनेस अब सिर्फ मशीन तय करेगी

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पटना, 2 जनवरी 2026: नए साल की शुरुआत से ही बिहार की सड़कों पर फिटनेस सिस्टम में बड़ा बदलाव लागू हो गया है। मिनिस्ट्री ऑफ रोड ट्रांसपोर्ट एंड हाइवेज (MoRTH) ने निर्देश जारी किया है कि अब गाड़ियों की फिटनेस केवल ऑटोमेटिक टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के जरिए ही मान्य होगी। इसका मतलब साफ है: इंसानी हस्तक्षेप खत्म, मशीन का फैसला चलेगा।
MoRTH के अंडर सेक्रेटरी मृत्युंजय कुमार की गाइडलाइन के मुताबिक, बिहार के 20 जिलों को चार ATS से जोड़ा गया है।
पटना ATS: भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, सारण, समस्तीपुर, बेगूसराय, लखीसराय
वैशाली ATS: मुजफ्फरपुर, समस्तीपुर, छपरा
रोहतास ATS: कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, भोजपुर, बक्सर
नालंदा ATS: नवादा, गया, शेखपुरा, जहानाबाद, लखीसराय
सरकार की मंशा स्पष्ट है: अनफिट वाहन सड़क पर नहीं चलेंगे और सड़क हादसों पर रोक लगाई जाएगी। ATS को गाड़ियों का “सिटी स्कैन” कहा जा सकता है। ब्रेक, सस्पेंशन, लाइट, साइड स्लिप, स्पीडोमीटर, ध्वनि और उत्सर्जन जैसी सभी जांच अब मशीन से होंगी, कोई अफसर या बिचौलिया इसमें हस्तक्षेप नहीं कर पाएगा।
हालांकि अभी स्थिति थोड़ी मुअल्लक है। परिवहन मुख्यालय पटना से औपचारिक आदेश जारी नहीं हुआ है, इसलिए फिलहाल फिटनेस जांच भौतिक रूप से हो रही है। लेकिन जैसे ही आदेश आएगा, पूरा सिस्टम ऑनलाइन ट्रैक पर काम करना शुरू कर देगा।
सरकार का कहना है कि जिन जिलों में ATS नहीं हैं, वहां भी जल्द इसका निर्माण होगा। यानी अब सड़क पर वही गाड़ी चलेगी, जो मशीन की नजर में फिट होगी। बिहार की सड़कों पर टेक्नोलॉजी का नया पहरा और नियमों की हुकूमत काबिज होने जा रही है।

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