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बीजेपी मंत्री नारायण प्रसाद ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप, कहा—‘फोन करने पर भी नहीं होता एक्शन

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बेतिया (प. चंपारण)।
बिहार में एनडीए की सरकार होने के बावजूद कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। इस बार आरोप किसी विपक्षी नेता ने नहीं, बल्कि खुद सत्तारूढ़ दल के मंत्री ने लगाए हैं। बिहार सरकार के मंत्री एवं नौतन विधायक नारायण प्रसाद ने बेतिया पुलिस पर भू-माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई न करने और प्रभाव में काम करने का गंभीर आरोप लगाया है।

सरकारी रास्ते पर कब्जे का आरोप

मंत्री नारायण प्रसाद के अनुसार मुफस्सिल थाना क्षेत्र के हरदिया गांव में एक भू-माफिया ने सरकारी रास्ते पर अतिक्रमण कर लिया है, जिससे करीब 100 किसानों का आवागमन बाधित हो गया है। मंत्री का कहना है कि इस मामले की जानकारी उन्होंने खुद थानाध्यक्ष को दी थी, लेकिन पुलिस समय पर घटनास्थल पर नहीं पहुंची।
डीएसपी-एसपी को फोन करना पड़ा’

मंत्री ने दावा किया कि जब स्थानीय थाना स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हुई, तब उन्होंने डीएसपी और एसपी को फोन कर स्थिति से अवगत कराया। इसके बाद पुलिस हरकत में आई, लेकिन तब तक जमीन की घेराबंदी कर दी गई थी।

मंत्री के ड्राइवर के साथ मारपीट

मामला यहीं नहीं रुका। 2 जनवरी 2026 को जब कथित भू-माफिया जमीन पर निर्माण कार्य करा रहा था, उसी दौरान मंत्री के चालक मौके पर पहुंचे। आरोप है कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसमें वह घायल हो गए। इसकी सूचना भी पुलिस को दी गई, लेकिन मंत्री का कहना है कि कार्रवाई में फिर देरी हुई।

पीड़ित का आरोप—‘जेसीबी चलती रही, पुलिस खामोश’

जमीन के असली मालिक प्रह्लाद मुखिया का कहना है कि उनकी जमीन पर जबरन कब्जा किया गया। पेड़ काटे गए और जेसीबी से काम चलता रहा। उन्होंने थाना में आवेदन भी दिया, लेकिन अब तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। पीड़ित का आरोप है कि उसे लगातार धमकियां मिल रही हैं।

थानाध्यक्ष पर सीधा आरोप

मंत्री नारायण प्रसाद ने कहा कि मुफस्सिल थाना पुलिस भू-माफियाओं के दबाव में काम कर रही है। उनके अनुसार जब तक ऊपर के अधिकारी हस्तक्षेप नहीं करते, तब तक स्थानीय पुलिस सक्रिय नहीं होती। मंत्री ने साफ कहा कि वह इस मामले की शिकायत उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा और डीजीपी बिहार से करेंगे और जरूरत पड़ी तो विधानसभा में भी मुद्दा उठाएंगे।

सरकार की सख्ती बनाम जमीनी हकीकत

एक ओर सरकार भूमाफियाओं पर बुलडोजर चलाने और सरकारी जमीन मुक्त कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर उसी सरकार के मंत्री पुलिस पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं। यह स्थिति प्रशासनिक कार्यशैली और कानून-व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर रही है।

पुलिस का पक्ष

बेतिया पुलिस का कहना है कि मामला भूमि विवाद से जुड़ा है और इसकी जांच की जा रही है। तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—
क्या मंत्री की शिकायत के बाद मुफस्सिल थाना पुलिस पर कोई ठोस कार्रवाई होगी,
या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?

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