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गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को हरी झंडी, बिहार में जमीन अधिग्रह

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केंद्र सरकार ने गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को लेकर बड़ी पहल करते हुए परियोजना को अंतिम मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही बिहार में इसके निर्माण की दिशा में जमीन पर काम शुरू हो गया है। पश्चिम चंपारण जिले के बैरिया और नौतन प्रखंडों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है, जहां कुल 187.23 हेक्टेयर जमीन चिन्हित की जा रही है।
करीब 550 किलोमीटर लंबा यह अत्याधुनिक छह लेन का एक्सप्रेस-वे लगभग 37,500 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किया जाएगा। यह सड़क बिहार के आठ महत्वपूर्ण जिलों—पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, शिवहर, सीतामढ़ी, मधुबनी, सुपौल, अररिया और किशनगंज—से होकर गुजरेगी। इससे उत्तर प्रदेश से लेकर बंगाल और पूर्वोत्तर भारत तक सीधी, तेज और सुरक्षित कनेक्टिविटी मिलेगी।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, बैरिया और नौतन प्रखंड के सात–सात मौजों को इस परियोजना में शामिल किया गया है। खेसरा चिन्हित करने का कार्य जल्द शुरू होगा, ताकि भू-अर्जन की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सके। जिला भू-अर्जन पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार ने बताया कि एक्सप्रेस-वे को शहरी आबादी से दूर रखा गया है, जिससे लोगों को कम से कम विस्थापन और परेशानी झेलनी पड़े।
इस मेगा प्रोजेक्ट से सिर्फ यातायात ही नहीं बदलेगा, बल्कि पूरे इलाके की तस्वीर भी बदलने की उम्मीद है। निर्माण कार्य के दौरान और उसके बाद स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। छोटे कारोबार, परिवहन, होटल, ढाबा और अन्य सेवाक्षेत्र को नई रफ्तार मिलेगी। साथ ही औद्योगिक कॉरिडोर के विकास से निवेश बढ़ेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियां मजबूत होंगी।
बताया जा रहा है कि इस एक्सप्रेस-वे से जुड़े कुल 39 प्रखंडों और 313 गांवों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिलेगा। गोरखपुर–सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे को बिहार के विकास के लिहाज से एक गेमचेंजर परियोजना माना जा रहा है, जो आने वाले वर्षों में राज्य के सामाजिक और आर्थिक परिदृश्य को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगी।

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