भारतीय रेलवे इतिहास के एक नए और पर्यावरण–अनुकूल दौर में प्रवेश करने जा रहा है। हरियाणा के जींद से सोनीपत के बीच देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन पटरी पर उतरने के लिए तैयार है। इसी सप्ताह जींद रेलवे स्टेशन पर इस अत्याधुनिक ट्रेन का लोड चेक फाइनल ट्रायल किया जाएगा।
ट्रायल सफल होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय से अंतिम स्वीकृति मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद यह ट्रेन नियमित रूप से परिचालन में आ जाएगी। यह परियोजना न सिर्फ तकनीकी उपलब्धि है, बल्कि ग्रीन इंडिया मिशन की दिशा में एक बड़ा कदम भी मानी जा रही है।
150 की रफ्तार, शून्य प्रदूषण – यही है हाइड्रोजन ट्रेन की पहचान
हाइड्रोजन ऊर्जा से संचालित यह ट्रेन अधिकतम 150 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होगी। रेलवे अधिकारियों के अनुसार,
9 किलोग्राम पानी से 900 ग्राम हाइड्रोजन तैयार की जाएगी, जिससे ट्रेन 1 किलोमीटर का सफर तय कर सकेगी।
इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का धुआं या प्रदूषण नहीं होगा, जिससे यह पूरी तरह पर्यावरण–अनुकूल बनती है।
जींद स्टेशन पर देश का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट
इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जींद रेलवे स्टेशन परिसर में स्पेन की ग्रीन एच कंपनी द्वारा अत्याधुनिक हाइड्रोजन उत्पादन प्लांट स्थापित किया गया है।
इस प्लांट को प्रधानमंत्री कार्यालय से पहले ही मंजूरी मिल चुकी है और इसे भारत का सबसे बड़ा हाइड्रोजन प्लांट बताया जा रहा है।
प्लांट के संचालन के लिए रेलवे ने 1.5 मेगावाट बिजली कनेक्शन लिया है, जिससे हाइड्रोजन गैस का उत्पादन किया जाएगा।
चेन्नई में बनी ट्रेन, हर सुविधा से लैस
चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) में निर्मित इस ट्रेन की संरचना भी खास है।
ट्रेन में कुल दोनों सिरों पर ड्राइवर पावर कार और बीच में यात्री कोच लगाए गए हैं।
26 जनवरी से जींद–सोनीपत के बीच करीब 90 किलोमीटर का ट्रायल रन प्रस्तावित है, जिसमें सीमित कोचों के साथ परीक्षण किया जाएगा।
तकनीकी खूबियां
प्रत्येक पावर कार में 1200 हॉर्स पावर का इंजन
फ्यूल सेल से 3750 एम्पीयर डीसी करंट का उत्पादन
एसी, लाइट और अन्य सुविधाएं पूरी तरह हाइड्रोजन ऊर्जा से संचालित
यात्री सुविधाएं
मेट्रो की तर्ज पर डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम
हर कोच में स्टेशन जानकारी
स्वचालित दरवाजे, जो सुरक्षा को और मजबूत बनाते हैं
सुरक्षा और स्टोरेज की पुख्ता व्यवस्था
ट्रेन में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन और 7,680 किलोग्राम ऑक्सीजन स्टोर करने की क्षमता है।
सुरक्षा के लिहाज से पावर कार के दोनों दरवाजे बंद होने के बाद ही ट्रेन चल सकेगी।
ट्रायल रिपोर्ट के बाद पीएम की हरी झंडी
ट्रायल की विस्तृत रिपोर्ट रेलवे, आरडीएसओ और ग्रीन एच कंपनी द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की जाएगी।
सभी मानकों पर सफल रहने के बाद प्रधानमंत्री द्वारा इस ट्रेन को देश को समर्पित किए जाने की संभावना है।
जींद के लिए गर्व का क्षण
इस परियोजना को लेकर जींद के विधायक एवं हरियाणा विधानसभा के डिप्टी स्पीकर डॉ. कृष्ण मिड्ढा ने इसे क्षेत्र के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
उनका कहना है कि जींद अब सिर्फ हरियाणा ही नहीं, बल्कि पूरे देश में ग्रीन टेक्नोलॉजी का उदाहरण बनेगा।
हरियाणा से उठेगा ग्रीन रेल क्रांति का संदेश
हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से न केवल प्रदूषण कम होगा, बल्कि भविष्य में भारतीय रेलवे की ऊर्जा निर्भरता भी बदलेगी।
नववर्ष 2026 की शुरुआत में यह उपलब्धि भारतीय रेल के इतिहास में मील का पत्थर साबित हो सकती है।