बांका।बिहार के बांका जिले से रिश्तों को शर्मसार कर देने वाली एक खौफनाक वारदात सामने आई है। जहां एक अधिवक्ता पिता ने सामाजिक इज्जत और तथाकथित मान-प्रतिष्ठा के नाम पर अपनी ही 17 वर्षीय नाबालिग बेटी की निर्मम हत्या कर दी। दिल दहला देने वाली इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है।
मामला बांका सदर थाना क्षेत्र के चमरैली गांव का है। यहां रहने वाले अधिवक्ता शशिभूषण झा ने अपनी बेटी सुप्रिया की हत्या कर न केवल पिता होने का फर्ज भुला दिया, बल्कि कानून को भी गुमराह करने की कोशिश की। हत्या के बाद आरोपी पिता ने खुद को बचाने के लिए बेटी के अपहरण की झूठी कहानी गढ़ी और थाने में मामला दर्ज करा दिया।
अपहरण की कहानी, अगले दिन मिली लाश
पुलिस के अनुसार, 2 जनवरी 2026 को परिजनों की ओर से बांका थाना में सुप्रिया के अपहरण की सूचना दी गई थी। पुलिस ने तुरंत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। लेकिन अगले ही दिन 3 जनवरी को स्थानीय चौकीदार ने सूचना दी कि चमरैली बांध के पास एक किशोरी का शव पड़ा है। शव की पहचान सुप्रिया के रूप में होते ही पूरे मामले की दिशा बदल गई।
घर की चारदीवारी में रचा गया कत्ल का प्लान
बांका एसपी उपेंद्र नाथ वर्मा के निर्देश पर एसडीपीओ अमर कुमार विश्वास के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया। एफएसएल टीम ने घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए। जांच आगे बढ़ी तो शक घर के भीतर ही गहराने लगा।
तकनीकी सर्विलांस, कॉल डिटेल और मैनुअल जांच के बाद पुलिस ने जब पिता और भाई से कड़ाई से पूछताछ की, तो दोनों टूट गए। आरोपियों ने स्वीकार किया कि 1 जनवरी की रात सुप्रिया अपने प्रेमी से विवाह की जिद पर अड़ी थी। इसी बात से नाराज होकर पिता और भाई ने मिलकर उसका गला रेत दिया।
सबूतों ने खोल दी झूठी शान की परत
हत्या के बाद शव को नहर में फेंक दिया गया और पिता ने साजिश के तहत बेटी के प्रेमी पर ही अपहरण का आरोप मढ़ दिया। लेकिन घर के अंदर मिले खून के निशान, एफएसएल रिपोर्ट और पिता के हाथ में बंधे कलावा पर लगे खून के छींटों ने उसकी पोल खोल दी।
सबसे अहम सबूत वह फोन कॉल बनी, जिसमें सुप्रिया की अपने प्रेमी से हुई आखिरी बातचीत रिकॉर्ड हो गई थी। कॉल के दौरान दर्ज हुई चीखों ने पूरे घटनाक्रम को बेनकाब कर दिया। पुलिस ने आंगन में आम के पेड़ के नीचे छिपाकर रखा गया हत्या में प्रयुक्त चाकू भी बरामद कर लिया है।
पिता और भाई जेल भेजे गए
पुलिस ने इस जघन्य हत्याकांड में मृतका के पिता शशिभूषण झा उर्फ कवि झा (55 वर्ष) और भाई ईशान कुमार (20 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों से आगे की पूछताछ जारी है।
जांच टीम की अहम भूमिका
इस सनसनीखेज हत्याकांड का सफल उद्भेदन करने वाली टीम में बांका एसडीपीओ अमर विश्वास के साथ सदर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार राय, तकनीकी शाखा प्रभारी इंस्पेक्टर राजेश कुमार, इंस्पेक्टर राकेश कुमार, सब-इंस्पेक्टर सुनील कुमार, जिबु कुमार यादव, परमानंद कांत, धर्मेंद्र कुमार, गुलशन पासवान, सुशील राज तथा सिपाही प्रभात और सोनू कुमार शामिल रहे।
यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है, बल्कि समाज को भी आईना दिखाती है कि झूठी शान और सामाजिक दबाव के नाम पर किस हद तक इंसानियत को कुचला जा सकता है।