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भीख से व्यवसाय तक: नीतीश सरकार की पहल से बिहार के भिक्षुक बन रहे आत्मनिर्भर

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पटना।बिहार सरकार भिक्षावृत्ति के उन्मूलन की दिशा में एक बड़ा सामाजिक बदलाव ला रही है। मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत अब राज्य के भिक्षुकों को केवल सहारा ही नहीं, बल्कि उद्यमी बनने का अवसर भी दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ते हुए सम्मानजनक और आत्मनिर्भर जीवन देना है।
इस योजना के तहत राज्य के 10 जिलों में 19 भिक्षुक पुनर्वास गृह संचालित किए जा रहे हैं, जहां जरूरतमंद भिक्षुकों को सुरक्षित आवास, नियमित भोजन और जीवनयापन से जुड़े व्यावहारिक प्रशिक्षण की सुविधा दी जा रही है। यहां रहने वाले लोगों को स्वरोजगार के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ताकि वे स्थायी आमदनी का साधन विकसित कर सकें।
स्वरोजगार के लिए आर्थिक मदद
सरकार की ओर से भिक्षुकों को 10 हजार रुपये तक की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है, जिससे वे छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें। इसके साथ ही आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक खाता खुलवाने में भी प्रशासन मदद करता है, ताकि वे सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ ले सकें।
समाज कल्याण विभाग के मुताबिक, अब तक 544 भिक्षुकों को आर्थिक सहायता दी जा चुकी है। वहीं वृद्ध, विधवा और दिव्यांग भिक्षुकों को सामाजिक सुरक्षा पेंशन से भी जोड़ा जा रहा है।
शिक्षा, प्रशिक्षण और पुनर्वास पर जोर
योजना के तहत भिक्षुकों और उनके बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था की जा रही है। युवाओं और सक्षम व्यक्तियों को कौशल विकास प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि वे रोजगार या स्वरोजगार के योग्य बन सकें। सरकार का दावा है कि इस पहल से कई परिवारों को स्थायी आजीविका का रास्ता मिला है।
उत्पादक समूह बनाकर कमाई का अवसर
भिक्षुकों के पुनर्वास को मजबूत बनाने के लिए राज्य में 6 सक्षम उत्पादक समूह गठित किए गए हैं। इन समूहों में अगरबत्ती, दिया-बाती, नारियल से बनी झाड़ू, चप्पल और जूट उत्पादों का निर्माण किया जाता है। इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय सीधे निर्माण करने वाले सदस्यों में वितरित की जाती है।
तेजी से बढ़ रहा पुनर्वास ढांचा
फिलहाल पटना, गया, नालंदा, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, पूर्णिया, सहरसा, भागलपुर, मुंगेर और सारण सहित कई जिलों में 19 पुनर्वास गृह संचालित हैं। यहां वृद्ध, दिव्यांग और शारीरिक रूप से अक्षम भिक्षुकों को नि:शुल्क मूलभूत सुविधाएं दी जा रही हैं।
इसके अलावा पूर्वी चंपारण, सीतामढ़ी, मधुबनी, वैशाली, अररिया, किशनगंज, जमुई, शेखपुरा, लखीसराय, मधेपुरा, औरंगाबाद, कटिहार, अरवल और रोहतास में 14 नए पुनर्वास गृह, जबकि भोजपुर जिले में 2 हाफ-वे होम की स्थापना और संचालन की प्रक्रिया जारी है।
सम्मान के साथ जीवन जीने की पहल
सरकार का कहना है कि यह योजना केवल भिक्षावृत्ति रोकने का प्रयास नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा और आत्मनिर्भरता की दिशा में सामाजिक सुधार का अभियान है। आने वाले समय में इस योजना के दायरे को और बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।

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