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भागलपुर में पुलिस पर रिश्वत का गंभीर आरोप, थाने में विधायक की दखल से मचा हड़कंप

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भागलपुर:बिहार के भागलपुर जिले से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। पीरपैंती थाना क्षेत्र में जमीन विवाद के एक केस को लेकर एक महिला ने पुलिस अवर निरीक्षक पर रिश्वत लेने और निर्दोष लोगों को फंसाने का आरोप लगाया है। मामला तूल तब पकड़ गया जब पीड़ित महिला न्याय की गुहार लेकर सीधे स्थानीय भाजपा विधायक के पास पहुंच गई।
पीड़िता कविता देवी का आरोप है कि पड़ोसियों के साथ चल रहे भूमि विवाद में पुलिस ने जानबूझकर उसे और विपिन सिंह को आरोपी बना दिया। इस मामले में विपिन सिंह के पिता को जेल भी जाना पड़ा। महिला का कहना है कि जब उसने खुद को निर्दोष बताते हुए थाने के चक्कर लगाए, तो जांच कर रहे दरोगा आर.एन. सिंह ने केस से नाम हटाने के बदले 15 से 20 हजार रुपये की मांग की।
पैसे देने के बाद भी नहीं मिली राहत
पीड़िता के अनुसार डर और दबाव के माहौल में उसने कई किश्तों में रुपये दिए, लेकिन इसके बावजूद न तो उसका नाम प्राथमिकी से हटाया गया और न ही मामले में कोई राहत मिली। उल्टा पुलिस का दबाव और बढ़ गया, जिससे परेशान होकर उसने जनप्रतिनिधि का दरवाजा खटखटाया।
विधायक के सामने दरोगा ने दी सफाई
थाने से निराश होकर कविता देवी पीरपैंती से भाजपा विधायक मुरारी पासवान के आवास पहुंची और रोते हुए अपनी पूरी आपबीती सुनाई। मामला गंभीर देख विधायक खुद पीरपैंती थाना पहुंचे, जहां उन्होंने थानाध्यक्ष और संबंधित दरोगा से सख्त लहजे में सवाल-जवाब किए। इस दौरान का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दरोगा रिश्वत लेने से इनकार करते हुए सफाई देता नजर आ रहा है।
थाने में लगी फटकार, निष्पक्ष जांच का भरोसा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक विधायक ने थाना परिसर में ही दरोगा को कड़ी फटकार लगाई और साफ कहा कि निर्दोष लोगों को फंसाना और रिश्वतखोरी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विधायक ने पीड़ितों को निष्पक्ष जांच और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
कार्रवाई न होने से नाराजगी
हालांकि विधायक के हस्तक्षेप के बावजूद अब तक न तो आरोपी दरोगा के खिलाफ कोई ठोस विभागीय कार्रवाई सामने आई है और न ही वरीय पुलिस अधिकारियों की ओर से आधिकारिक बयान जारी किया गया है। इससे इलाके में लोगों में नाराजगी है और पुलिस प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
पीड़ित महिला और विपिन सिंह ने मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, रिश्वतखोरी के आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और निर्दोष लोगों को जल्द से जल्द मुकदमे से मुक्त किया जाए।

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