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सिंघिया में 8 जनवरी को विशाल धरना का ऐलान, मनरेगा बहाली से लेकर धान खरीद तक कई मांगें

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समस्तीपुर (सिंघिया)।केंद्र एवं राज्य सरकार की कथित किसान-मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ वामपंथी मजदूर एवं किसान जन-संगठनों ने बड़ा आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। संगठन की ओर से जारी आह्वान के अनुसार दिनांक 8 जनवरी 2026 को पूर्वाह्न 10:30 बजे से सिंघिया प्रखंड सह अंचल कार्यालय परिसर में विशाल धरना दिया जाएगा। इस धरने में मजदूर, किसान, भूमिहीन, गरीब एवं आम जनता से बड़ी संख्या में भाग लेने की अपील की गई है।
संगठन का आरोप है कि आज़ादी के 78 वर्षों बाद भी पूंजीवादी नीतियों के चलते देश के किसान और मजदूर बदहाल स्थिति में जीने को मजबूर हैं। वामपंथी संघर्षों के दबाव में बना मनरेगा कानून 2005 को कमजोर कर भी.बी.जी. राम जी जैसी योजनाएं लाकर सरकार ने मजदूरों के अधिकारों पर चोट की है। साथ ही दर्जनों मजदूर हितैषी कानूनों को समाप्त कर चार श्रम कोड लागू किए जाने को मजदूर-विरोधी कदम बताया गया है।
धरना के आह्वान में कहा गया है कि ठोस एमएसपी कानून के अभाव में बिहार के किसान 1500–1600 रुपये प्रति क्विंटल धान बेचने को मजबूर हैं, जबकि पैक्स और मिलरों की मिलीभगत से कागजों पर फर्जी खरीद-बिक्री जारी है। सरकार द्वारा घोषित 2369 रुपये प्रति क्विंटल की दर पर खरीद और 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस की मांग को लेकर किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
खाद और बीज की कालाबाजारी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। संगठन के अनुसार 266 रुपये का यूरिया 400–500 रुपये प्रति बैग और 1350 रुपये का डीएपी 1800 रुपये प्रति बैग में खरीदने की मजबूरी है, जबकि प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
वक्तव्य में यह भी आरोप लगाया गया है कि विधानसभा चुनाव के बाद से बिहार में बुलडोजर नीति अपनाकर बिना वैकल्पिक व्यवस्था किए लाखों गरीबों और भूमिहीनों के घर उजाड़े गए हैं। वर्षों से बसे लोगों के पुनर्वास, वासगीत पर्चा एवं बंदोबस्ती जैसे सवालों पर सरकार की चुप्पी को अमानवीय बताया गया है।
स्थानीय समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा गया कि सिंघिया प्रखंड में आधार केंद्र बंद, दाखिल-खारिज व परिमार्जन प्लस में भारी भ्रष्टाचार, सरकारी नलकूपों का बंद रहना आम जनता की परेशानी बढ़ा रहा है।
धरना की प्रमुख मांगें
भी.बी.जी. राम जी योजना वापस लेकर मनरेगा कानून बहाल किया जाए, 200 दिन काम और 700 रुपये प्रतिदिन न्यूनतम मजदूरी की गारंटी हो।
मजदूर विरोधी चार श्रम कोड वापस लेकर मजदूर हितैषी कानून बहाल किए जाएं।
बिना वैकल्पिक व्यवस्था के गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाना बंद किया जाए।
भूमि सुधार कानूनों का पालन करते हुए वर्षों से बसे भूमिहीनों को वासगीत/बंदोबस्ती पर्चा दिया जाए।
सभी पंचायतों व नगर निकायों में 2369 + 500 बोनस की दर से धान खरीद की गारंटी हो और पैक्स-मिलर गठजोड़ पर कार्रवाई हो।
खाद की कालाबाजारी पर सख्त रोक लगे।
सिंघिया प्रखंड में बंद आधार केंद्र अविलंब चालू किया जाए।
सभी बंद सरकारी नलकूप चालू किए जाएं।
दाखिल-खारिज एवं परिमार्जन में रिश्वतखोरी और धांधली पर रोक लगे।
धरना के आयोजक वामपंथी मजदूर एवं किसान जन-संगठन, प्रखंड सिंघिया (जिला समस्तीपुर) ने सभी किसान-मजदूरों से एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।
संपर्क: 9939113181, 9572601630
यह आंदोलन आने वाले दिनों में ग्रामीण जनजीवन से जुड़े सवालों को लेकर प्रशासन और सरकार की अग्निपरीक्षा माना जा रहा है।

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