नई दिल्ली।2020 के दिल्ली दंगे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएँ ठुकरा दी हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोनों आरोपियों का मामला अन्य कैदियों से अलग है और उनकी भूमिका गंभीर है। अब दोनों आरोपी जेल में ही रहेंगे, और अगले एक साल तक जमानत के लिए कोई अपील नहीं कर पाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने यह फैसला सुनाया। वहीं, अदालत ने एक्टिविस्ट गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद की जमानत मंजूर कर दी।
कोर्ट का रुख और आरोप की गंभीरता
कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दोनों आरोपियों की मुख्य भूमिका रही है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जेल में लंबी अवधि तक बंद रहना संविधान या कानून का उल्लंघन नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश 10 दिसंबर 2025 को सुरक्षित रखा था और सभी पक्षों की दलीलों के बाद सुनाया।
वकीलों का पक्ष
उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से पेश वकीलों ने कहा कि उनके क्लाइंट पांच साल से अधिक समय से हिरासत में हैं। उन्होंने तर्क दिया कि ट्रायल शुरू होने की संभावना नहीं है और अब तक कोई ठोस सबूत नहीं है कि दोनों ने दंगे भड़काए। वकीलों ने अदालत को बताया कि हिरासत की लंबी अवधि न्यायिक प्रक्रिया में देरी के कारण है।
दिल्ली पुलिस की आपत्ति
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि कथित अपराध राज्य को अस्थिर करने के इरादे से किए गए थे। पुलिस ने यह तर्क दिया कि यह केवल अचानक हुए विरोध प्रदर्शन नहीं थे, बल्कि सोची-समझी, पूरे भारत में फैलाने की साजिश थी।
पुलिस ने कहा कि साजिश उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति के भारत दौरे के दौरान रची गई थी, ताकि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा जा सके और CAA (सिटिजनशिप अमेंडमेंट एक्ट) के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर प्रमुखता दी जा सके।
पुलिस के अनुसार, इस साजिश के कारण 53 लोग मारे गए और 700 से अधिक घायल हुए, साथ ही सार्वजनिक संपत्ति को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। दिल्ली में 753 एफआईआर दर्ज की गईं।
हाई कोर्ट का पिछला फैसला
2 सितंबर 2025 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम समेत नौ आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। हाई कोर्ट ने कहा कि दोनों ने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को बड़े पैमाने पर इकट्ठा करने के लिए सांप्रदायिक आधार पर भड़काऊ भाषण दिए और पूरी साजिश में उनकी भूमिका गंभीर थी।
गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया
उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य आरोपियों को फरवरी 2020 में दिल्ली दंगों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। ये दंगे उस समय प्रस्तावित CAA और NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान भड़के थे।
हिंसा में 53 लोगों की मौत हुई और 700 से ज्यादा लोग घायल हुए।
दंगे में भारी पैमाने पर संपत्ति को नुकसान पहुँचा।
आरोपियों के खिलाफ UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत सख्त नियमों के तहत मामला दर्ज किया गया।
दंगे का सामाजिक और कानूनी
दिल्ली दंगों की घटना ने पूरे शहर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा और साम्प्रदायिक तनाव बढ़ाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश ने यह स्पष्ट किया कि गंभीर आरोपों के मामले में जमानत की अनुमति केवल तभी दी जा सकती है जब साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह जांच के बाद साफ हो।सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि गुलफिशा फातिमा और अन्य पांच एक्टिविस्ट की जमानत से यह संदेश जाता है कि अदालत सबूतों और भूमिका के आधार पर अलग-अलग फैसले ले सकती है।