:
Breaking News

एक तरफ सख्ती के दावे, दूसरी तरफ बागमती पर माफिया राज

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बालू माफियाओं के कब्जे में जीवनदायिनी नदी, खुफिया सूची से मचा प्रशासनिक हड़कंप

मुजफ्फरपुर/दरभंगा।एक ओर बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा भागलपुर के टाउन हॉल में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश दे रहे थे, तो दूसरी ओर राज्य की जीवनदायिनी बागमती नदी बालू माफियाओं के कब्जे में दम तोड़ती नजर आ रही है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि नदी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। माफिया बेखौफ होकर जेसीबी और ट्रैक्टरों से नदी की छाती चीर रहे हैं और निकाले गए बालू की खुलेआम कालाबाज़ारी हो रही है।

 खुफिया विभाग की लिस्ट से मचा हड़कंप

वर्षों से स्थानीय प्रशासन की कथित अनदेखी में फल-फूल रहे इस अवैध कारोबार पर अब बिहार पुलिस मुख्यालय के खुफिया विभाग की नजर पड़ी है। खुफिया शाखा ने औराई क्षेत्र समेत बागमती घाटी में सक्रिय करीब डेढ़ दर्जन बालू माफियाओं की सूची तैयार कर दी है। सूची सामने आते ही प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
खान एवं भूतत्व विभाग ने खुफिया रिपोर्ट के आधार पर इन माफियाओं की गिरफ्तारी के निर्देश जारी करते हुए कार्रवाई की जिम्मेदारी सीधे जिला पदाधिकारी (DM) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को सौंपी है। विशेष शाखा के एसपी ने दोनों अधिकारियों से शीघ्र कार्रवाई रिपोर्ट भी मांगी है।

 धारा बदली, सूखी पुरानी नदी

नेपाल से निकलकर शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर और दरभंगा से गुजरने वाली बागमती नदी कटौझा के आगे बेनीपुर रेलवे गाइड बांध के पास अपनी धारा बदल लेती है। इसके बाद नदी की पुरानी मुख्यधारा लगभग पूरी तरह सूख चुकी है। इसी सूखी धारा और आसपास के इलाकों को माफियाओं ने खनन का सुरक्षित ठिकाना बना लिया है।

 गांव बने खनन का अखाड़ा

बेनीपुर, नयागांव, बभनगामा और चाहूंता जैसे गांव आज अवैध खनन के केंद्र बन चुके हैं। यहां दिन-रात मशीनों की आवाज गूंजती रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि खनन का विरोध करने की हिम्मत अब कोई नहीं करता, क्योंकि माफिया पूरी तरह संगठित हैं।

 तटबंध भी खतरे में

अवैध खनन का असर सिर्फ नदी की धारा तक सीमित नहीं है। डाउन तटबंध पर भी गंभीर खतरा पैदा हो गया है। महुआरा, महेशबारा, चैनपुर, जनाढ़, भरथुआ, राघोपुर, तरबन्ना, बभनगामा, हरनी टोला, बाड़ा खुर्द, बड़ा बुजुर्ग और मधुबन जैसे इलाकों में बागमती के बालू का खुलेआम कारोबार हो रहा है। तटबंधों पर बन रही सड़कों की आड़ में माफियाओं का हौसला और बढ़ गया है।

 कागजों के खेल से बच निकलते हैं माफिया

माफियाओं का तरीका भी बेहद शातिराना है। तटबंध के अंदर स्थित रैयती जमीन पर मिट्टी काटने का वैध एग्रीमेंट करा लिया जाता है, लेकिन उसी बहाने नदी की मुख्य और उपधाराओं से बड़े पैमाने पर बालू निकाल लिया जाता है। जब कभी कार्रवाई की नौबत आती है, तो कागजात दिखाकर बच निकलते हैं। अब खुफिया विभाग ने इस पूरे खेल की परतें खोल दी हैं।

 बड़ा सवाल, होगी कार्रवाई या फिर…

अब सवाल सीधा है—
क्या प्रशासन इन बालू सरगनाओं पर सचमुच कानून का शिकंजा कसेगा, या फिर बागमती यूं ही माफियाओं की भेंट चढ़ती रहेगी?
फिलहाल सबकी निगाहें डीएम और एसएसपी की कार्रवाई पर टिकी हैं, जिनके अगले कदम से यह तय होगा कि सरकार के सख्त तेवर ज़मीन पर भी दिखेंगे या नहीं।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *