पटना।बिहार में भ्रष्टाचार की जड़ें पंचायत स्तर से लेकर राज्य प्रशासन तक फैल चुकी हैं, और इसे रोकने के लिए निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने अब निर्णायक कदम उठाया है। साल 2012 से 2019 के बीच दर्ज मामलों की समीक्षा के बाद, ब्यूरो ने आठ भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की अवैध रूप से अर्जित संपत्ति जब्त करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। कुल संपत्ति की कीमत करीब 4.14 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
निगरानी ब्यूरो ने संबंधित सक्षम प्राधिकार और अदालतों को प्रस्ताव भेज दिया है। अनुमति मिलने के बाद इन संपत्तियों पर सरकारी अधिग्रहण (राज्यसात) की औपचारिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।
भ्रष्टाचार का दायरा: पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक
ब्यूरो की जांच में सामने आया है कि भ्रष्टाचार केवल उच्च अधिकारियों तक ही सीमित नहीं है। राज्य के अलग-अलग जिलों में पंचायत स्तर के मुखिया, प्रखंड और अनुमंडल स्तर के अधिकारी, जिला प्रशासन के कर्मचारी, न्यायिक दंडाधिकारी और राज्य विभागों के पदाधिकारी भी इस घोटाले में शामिल पाए गए हैं।
इस कार्रवाई के तहत जिन आठ लोगों के खिलाफ संपत्ति जब्ती का प्रस्ताव भेजा गया है, उनमें शामिल हैं:
दो तत्कालीन पंचायत मुखिया
एक न्यायिक दंडाधिकारी
एक अधीक्षण अभियंता
एक फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर
एक अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ)
एक टैक्स दारोगा
महिला एवं बाल विकास विभाग की एक सीडीपीओ
इन सभी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामले दर्ज हैं।
अलग-अलग मामलों में बड़ी संपत्तियां
लखीसराय जिले के तत्कालीन फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर दिलीप कुमार के पास 88.25 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति पाई गई।
गोपालगंज के हथुआ अनुमंडल में एसडीओ रहे विजय प्रताप सिंह के खिलाफ तीन मामले दर्ज हैं और उनके नाम 62.35 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने का प्रस्ताव भेजा गया है।
पटना ग्रामीण की तत्कालीन सीडीपीओ फूलपरी देवी, मोतिहारी के तत्कालीन टैक्स दारोगा अजय कुमार गुप्ता, और समस्तीपुर जिले के जितवारिया ग्राम पंचायत के पूर्व मुखिया प्रमोद कुमार राय के खिलाफ कुल मिलाकर 61 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति की पहचान हुई।
ग्रामीण कार्य विभाग के पूर्व अधीक्षण अभियंता ओमप्रकाश मांझी के खिलाफ 90.75 लाख रुपये की संपत्ति जब्त करने की अनुशंसा की गई।
पश्चिम चंपारण के लौरिया प्रखंड अंतर्गत राजमारहिया पकड़ी पंचायत के तत्कालीन मुखिया मैनेजर यादव की संपत्ति 80.04 लाख रुपये बताई गई।
दरभंगा के तत्कालीन न्यायिक दंडाधिकारी राकेश कुमार राय के खिलाफ 41.12 लाख रुपये की अवैध संपत्ति पाई गई।
निगरानी ब्यूरो की व्यापक कार्रवाई
अब तक निगरानी ब्यूरो ने कुल 119 मामलों में करीब 96.76 करोड़ रुपये की संपत्तियों को राज्यसात करने का प्रस्ताव भेजा है। इनमें से 66 मामले, जिनकी संपत्ति लगभग 57 करोड़ रुपये है, सक्षम प्राधिकार और अदालतों में लंबित हैं। 32 मामले उच्च न्यायालय में विचाराधीन हैं, जबकि दो मामले सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी के रूप में हैं।
ब्यूरो के महानिदेशक जितेंद्र सिंह गंगवार ने बताया कि अब तक 11 मामलों में 6.03 करोड़ रुपये की संपत्तियां अंतिम रूप से जब्त की जा चुकी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचारियों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई जारी रहेगी और अवैध संपत्तियों को राज्यसात करने की प्रक्रिया तेज की जा रही है।
बिहार में भ्रष्टाचार का गंभीर परिदृश्य
विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में भ्रष्टाचार का दायरा सिर्फ पंचायत स्तर तक ही नहीं है, बल्कि यह राज्य प्रशासन के उच्चतम स्तर तक फैला हुआ है। चाहे वह सरकारी परियोजनाओं का टेंडर, वित्तीय अनियमितताएं, भ्रष्टाचार के लिए रिश्वत, या आय से अधिक संपत्ति का मामला हो, राज्य में कई अधिकारी और जनप्रतिनिधि इसमें शामिल पाए जाते हैं।
निगरानी ब्यूरो की यह कार्रवाई न केवल भ्रष्ट अधिकारियों को सबक सिखाने, बल्कि राज्य प्रशासन में पारदर्शिता और जनता के लिए साफ-सुथरा प्रशासन सुनिश्चित करने की दिशा में भी अहम कदम है।
"हम आम जनता के लिए साफ प्रशासन और सुविधा पक्की करने के लिए जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी के तहत भ्रष्टाचार के खिलाफ लगातार कार्रवाई कर रहे हैं। अब तक, हमने कुल 122 केस दर्ज किए हैं, जो पिछले औसत से कई गुना ज्यादा हैं। हमने 101 ट्रैप केस भी दर्ज किए हैं।"
– जितेंद्र सिंह गंगवार, महानिदेशक, निगरानी ब्यूरो
ब्यूरो का संदेश साफ है – बिहार में अब भ्रष्टाचारियों के लिए कोई जगह नहीं। पंचायत स्तर से लेकर राज्य प्रशासन तक किसी को भी बचने की अनुमति नहीं दी जाएगी।