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लालू के नाती आदित्य ने शुरू की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग, रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर साझा किया गर्व

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पटना: राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के नाती आदित्य और तेजस्वी यादव के भांजे ने सेना की ट्रेनिंग लेना शुरू कर दिया है। लालू की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने बेटे आदित्य का फोटो और वीडियो साझा कर यह जानकारी दी।
रोहिणी आचार्य ने साझा किया गर्व
रोहिणी ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनका बेटा 18 साल की उम्र में प्री-यूनिवर्सिटी की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2 साल की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग (BMT) के लिए गया है। उन्होंने आदित्य की बहादुरी, साहस और अनुशासन की तारीफ की और कहा:
"जाओ कमाल कर दिखाओ। जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं। हमारा सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।"
रोहिणी ने अपने बेटे को ट्रेनिंग कैंप छोड़ते समय हाथ में हथियार उठाकर निशाना लगाते हुए भी फोटो पोस्ट की। उन्होंने लिखा कि सही और गलत को पहचानना और निशाना लगाना जीवन में बेहद जरूरी है।
बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग का महत्व
सिंगापुर में पुरुष नागरिकों के लिए नेशनल सर्विस के तहत सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य होता है। यह दो साल की बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग युवाओं में अनुशासन, शारीरिक फिटनेस, टीम वर्क और नेतृत्व कौशल विकसित करने के लिए है।
इस ट्रेनिंग में सैनिकों को हथियारों की जानकारी, फायरिंग, परेड, मार्चिंग, जंगल और मैदान में जीवित रहने की तकनीक सिखाई जाती है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद उन्हें इन्फैंट्री, नेवी या एयरफोर्स यूनिट्स में तैनात किया जाता है।
रोहिणी और परिवार की पृष्ठभूमि
पिछले कुछ समय से रोहिणी आचार्य अपने परिवार से नाराज चल रही हैं। विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद उनके और तेजस्वी यादव के बीच मतभेद की खबरें सामने आई थीं। रोहिणी ने मीडिया और सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें अपने मायके में अपमान झेलना पड़ा और कई गंभीर आरोप तेजस्वी यादव और अन्य पर लगाए।
"कल मुझे गालियों के साथ कहा गया कि मैं गंदी हूं। मैंने अपने पिता को अपनी किडनी लगवा दी, करोड़ों रूपए लिए, टिकट लिया।"
इस बीच, आदित्य की सैन्य ट्रेनिंग और अनुशासन ने पूरे परिवार में गर्व पैदा किया। रोहिणी ने लिखा कि जीवन में सही और गलत पहचानना और साहस के साथ चुनौतियों का सामना करना जरूरी है।
युवा आदित्य की तैयारी और उम्मीदें
आदित्य की ट्रेनिंग सख्त, चुनौतीपूर्ण और अनुशासनपूर्ण होगी। इस ट्रेनिंग के दौरान वह न केवल शारीरिक और मानसिक मजबूती विकसित करेगा, बल्कि टीम वर्क और नेतृत्व कौशल में भी निपुण होगा। यह अनुभव उसे भविष्य में सेना की किसी भी यूनिट में सफलता और सम्मान दिलाने में मदद करेगा।
रोहिणी ने अपने बेटे को प्रेरित करते हुए लिखा:
"आदित्य, तुम बहादुर, साहसी और अनुशासन के साथ रहने वाले हो। हमेशा याद रखना कि जीवन की सबसे कठिन लड़ाइयों में ही योद्धा बनते हैं। हम सबों का सारा प्यार और हौसला हमेशा तुम्हारे साथ है।"
इस प्रकार आदित्य अब परिवार और समाज के लिए गर्व का प्रतीक बन गए हैं, और उनकी सैन्य ट्रेनिंग आने वाले वर्षों में उन्हें अनुशासन, साहस और नेतृत्व के गुण सिखाने में मदद करेगी।

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