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निगरानी कोर्ट का बड़ा फैसला: साक्ष्य के अभाव में डीए केस समाप्त, अधिकारी को राहत

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पटना।विशेष निगरानी इकाई (SVU) द्वारा दर्ज आय से अधिक संपत्ति के मामलों पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल के एक अहम फैसले में निगरानी न्यायालय ने दो अधिकारियों के खिलाफ दर्ज डीए मामलों को रद्द कर दिया है, जबकि एक अन्य हाई-प्रोफाइल केस में जांच के दौरान कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिलने पर आरोपी अधिकारी को पूरी तरह क्लीनचिट दे दी गई।
यह मामला बिहार के खान एवं भूतत्व विभाग के तत्कालीन मंत्री जनक राम के सरकारी आप्त सचिव (PS) रहे मृत्युंजय कुमार से जुड़ा है। SVU ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया था और कई ठिकानों पर छापेमारी भी की गई थी।

जांच चली, लेकिन सबूत नहीं मिले

लंबी जांच के बाद विशेष निगरानी इकाई के जांच अधिकारी को मृत्युंजय कुमार के खिलाफ कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला। इसके बाद 9 दिसंबर 2024 को साक्ष्य के अभाव में अंतिम प्रतिवेदन निगरानी न्यायालय में दाखिल किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार करते हुए केस का निपटारा कर दिया।
निगरानी अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा कि अभियुक्तों के विरुद्ध आगे की कार्यवाही के लिए रिकॉर्ड पर कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है, इसलिए जांच अधिकारी की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार की जाती है।

निलंबन, विभागीय कार्रवाई और फिर राहत

SVU की रिपोर्ट के आधार पर मृत्युंजय कुमार को 1 दिसंबर 2021 को निलंबित किया गया था और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनिक कार्रवाई शुरू की गई थी। उनसे लिखित जवाब मांगा गया, जांच अधिकारी नियुक्त किए गए और कार्रवाई लंबी चली।
लगभग दो साल के निलंबन के बाद 11 जनवरी 2024 को उन्हें निलंबन से मुक्त किया गया।
इधर, विभागीय जांच में भी उनके खिलाफ लगाए गए आरोप प्रमाणित नहीं हो सके। जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि गठित आरोप अप्रमाणित हैं।

सरकार ने खत्म की कार्रवाई, मिलेगा पूरा वेतन

निगरानी अदालत के फैसले और विभागीय जांच रिपोर्ट के बाद मुख्य सचिव स्तर पर 10 दिसंबर 2025 को मामले की समीक्षा हुई। इसके बाद सरकार ने मृत्युंजय कुमार के खिलाफ चल रही अनुशासनिक कार्रवाई को समाप्त करने, निलंबन अवधि को नियमित करने और पूर्ण वेतन भुगतान की अनुशंसा की।
इसी क्रम में 2 जनवरी 2026 को सामान्य प्रशासन विभाग ने आधिकारिक आदेश जारी कर तत्कालीन मंत्री के PS को पूरी तरह पाक-साफ घोषित कर दिया।

SVU की कार्यप्रणाली पर फिर बहस

इस पूरे घटनाक्रम के बाद विशेष निगरानी इकाई की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। पहले केस दर्ज करना, लंबा निलंबन और फिर साक्ष्य के अभाव में मामला खत्म होना—इन फैसलों ने सरकारी महकमे और प्रशासनिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

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