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महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर, नगर निकाय में BJP–कांग्रेस एक मंच पर

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महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है जिसने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। आमतौर पर एक-दूसरे के सबसे बड़े विरोधी माने जाने वाले भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस इस बार स्थानीय सत्ता के लिए एक ही खेमे में खड़े नजर आए हैं। इस अप्रत्याशित मेल को लेकर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और इसे सिद्धांतों से समझौता करार दिया है।
दरअसल, मामला ठाणे जिले की अंबरनाथ म्युनिसिपल काउंसिल से जुड़ा है, जहां BJP और कांग्रेस ने अजित पवार गुट की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के साथ मिलकर नगर परिषद की सत्ता अपने हाथ में ले ली है। इस नए समीकरण के चलते एकनाथ शिंदे की शिवसेना को परिषद से बाहर होना पड़ा है।
शिंदे परिवार के गढ़ में सेंध
अंबरनाथ मुंबई महानगर क्षेत्र का अहम उपनगरीय इलाका है और यह क्षेत्र डिप्टी मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के पुत्र डॉ. श्रीकांत शिंदे की कल्याण लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है। ठाणे जिला लंबे समय से शिंदे परिवार का प्रभाव क्षेत्र माना जाता रहा है। ऐसे में इस परिषद से शिवसेना की विदाई को राजनीतिक तौर पर बड़ा झटका माना जा रहा है।
आंकड़ों के खेल में पलटी बाजी
59 वार्डों वाली अंबरनाथ नगर परिषद में चुनाव के बाद शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। उसे कुल 23 सीटें मिली थीं। वहीं BJP को 16, कांग्रेस को 12 और अजित पवार गुट की NCP को 4 सीटें हासिल हुई थीं।
BJP की ओर से तेजश्री करंजुले प्रत्यक्ष चुनाव के जरिए परिषद अध्यक्ष चुनी गई थीं।
हालांकि, बाद में बदले सियासी समीकरणों में BJP, कांग्रेस और NCP एक साथ आ गईं। तीनों दलों के पास कुल 32 सीटें हो गईं, जिससे उन्होंने बहुमत हासिल कर लिया और शिवसेना विपक्ष में सिमट गई।
‘अंबरनाथ सिटी डेवलपमेंट फ्रंट’ का गठन
इस नए गठबंधन को ‘अंबरनाथ सिटी डेवलपमेंट फ्रंट’ नाम दिया गया है। इसमें BJP, कांग्रेस, NCP (अजित पवार गुट) के साथ रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आठवले) भी शामिल है।
गठबंधन की ओर से कहा गया है कि विचारधारात्मक मतभेदों को पीछे छोड़कर शहर के विकास को प्राथमिकता दी जाएगी।
परिषद अध्यक्ष तेजश्री करंजुले का कहना है कि यह कदम अंबरनाथ के समग्र विकास को ध्यान में रखकर उठाया गया है।
शिवसेना का तीखा हमला
इस घटनाक्रम पर शिवसेना ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के विधायक बालाजी किनिकर ने इसे “अपवित्र और मौकापरस्त गठबंधन” बताया। वहीं डॉ. श्रीकांत शिंदे ने कहा कि जिन दलों के खिलाफ चुनाव लड़ा गया, उन्हीं के साथ सत्ता के लिए हाथ मिलाना जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ है।
आम आदमी पार्टी की मुंबई अध्यक्ष प्रीति शर्मा मेनन ने भी इस गठबंधन को लेकर तंज कसते हुए कहा कि नगर निकाय चुनावों में बढ़ती राजनीतिक अवसरवादिता लोकतंत्र के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है।
35 साल बाद बदली सत्ता
गौरतलब है कि अविभाजित शिवसेना लगभग 35 वर्षों से अंबरनाथ नगर परिषद पर काबिज रही थी। ऐसे में परिषद की सत्ता का हाथ से निकलना ठाणे जिले की स्थानीय राजनीति में एक बड़े बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है।
कुल मिलाकर, अंबरनाथ नगर परिषद का यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरणों और बदलती रणनीतियों की साफ झलक दिखाता है, जहां सत्ता के गणित के आगे पुरानी राजनीतिक रेखाएं धुंधली पड़ती नजर आ रही हैं।

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