पटना। बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) एक बार फिर विवादों में घिर गया है। आयोग की जिम्मेदारी संभालने के महज छह दिन बाद ही नव नियुक्त अध्यक्ष आलोक राज का पद से इस्तीफा देना कई सवाल खड़े कर रहा है। 31 दिसंबर 2025 को कार्यभार ग्रहण करने वाले आलोक राज को एक ईमानदार और सख्त प्रशासनिक अधिकारी के रूप में जाना जाता है। ऐसे में उनका अचानक पद छोड़ना छात्रों और प्रतियोगी अभ्यर्थियों के बीच बेचैनी का कारण बन गया है।
इस घटनाक्रम को लेकर छात्र नेता दिलीप कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग के भीतर आलोक राज को स्वतंत्र रूप से काम करने का अवसर नहीं दिया गया और उन पर कथित तौर पर एक भ्रष्ट तंत्र का दबाव बनाया जा रहा था। दिलीप कुमार के अनुसार, आलोक राज ऐसे फैसलों के पक्ष में नहीं थे जो उनकी कार्यशैली और ईमानदारी के खिलाफ हों।
“गलत निर्णय लेने का था दबाव”
दिलीप कुमार ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो बयान में कहा कि आलोक राज की छवि एक निष्पक्ष और पारदर्शी अधिकारी की रही है। उनका इस्तीफा इस बात का संकेत है कि वे आयोग में चल रही कथित अनियमितताओं के साथ समझौता नहीं करना चाहते थे। छात्र नेता का दावा है कि अध्यक्ष पर कुछ ऐसे निर्णय लेने का दबाव था, जिनसे परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती थी।
उन्होंने यह भी कहा कि चर्चाओं के अनुसार, बिहार के एक प्रभावशाली राजनीतिक चेहरे की ओर से आयोग पर दबाव बनाया जा रहा था कि आगामी प्रमुख परीक्षाएं—जैसे द्वितीय इंटर स्तरीय और CGL-4—एक निजी एजेंसी के माध्यम से ऑनलाइन कराई जाएं। आरोप है कि संबंधित एजेंसी पहले से ही विवादों और ब्लैकलिस्ट से जुड़ी रही है। दिलीप कुमार ने यह भी सवाल उठाया कि राज्य के पास खुद का ऑनलाइन परीक्षा ढांचा न होने से निजी एजेंसियों को खुला मैदान मिल रहा है, जिससे गड़बड़ियों की आशंका बढ़ जाती है।
पुराने विवादित अधिकारियों की नियुक्ति पर नाराजगी
छात्र नेता ने आयोग की संरचना पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप है कि 67वीं BPSC परीक्षा के दौरान विवादों में आए कुछ अधिकारियों को अब BSSC में अहम पद दिए गए हैं। उन्होंने अमरेन्द्र कुमार का नाम लेते हुए कहा कि जिन अधिकारियों पर पहले पेपर लीक जैसे गंभीर आरोप लगे, उनकी वापसी छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ के समान है। दिलीप के मुताबिक, यह सब आगामी 24 हजार से अधिक पदों पर होने वाली भर्तियों को लेकर बड़े खेल की आशंका को जन्म देता है।
मुख्यमंत्री से जांच और हस्तक्षेप की मांग
दिलीप कुमार ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से पूरे मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार वास्तव में सुशासन और पारदर्शिता के प्रति गंभीर है, तो यह पता लगाया जाना चाहिए कि किन परिस्थितियों में एक ईमानदार अधिकारी को इतने कम समय में पद छोड़ना पड़ा। छात्र नेता ने चेतावनी दी कि यदि आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता नहीं लाई गई और योग्य अधिकारियों को स्वतंत्र रूप से काम करने का मौका नहीं मिला, तो राज्य भर के छात्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
BSSC में हुआ यह घटनाक्रम एक बार फिर बिहार की परीक्षा और भर्ती प्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है, जिसका असर आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति और छात्र आंदोलनों पर भी देखने को पड़ सकता है।