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चार दिन बाद भी नहीं खुले काउंटर: सरकारी बैंकों की हड़ताल से लेनदेन रुका, डिजिटल सहारा बना विकल्प

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नई दिल्ली: देशभर में आज 27 जनवरी को सरकारी बैंकों के काउंटर सूने रहे। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के आह्वान पर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों ने पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह की मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी हड़ताल की, जिससे नकद जमा–निकासी, चेक क्लीयरेंस और ड्राफ्ट जैसी शाखा-स्तरीय सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं। लगातार अवकाशों के बाद अचानक आई हड़ताल ने ग्राहकों की परेशानी और बढ़ा दी।
मांग वही, टकराव पुराना
बैंक यूनियनों का कहना है कि मार्च 2024 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ वेतन समझौते के दौरान सभी शनिवार अवकाश को लेकर सैद्धांतिक सहमति बनी थी, लेकिन अब तक सरकार की ओर से औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई। यूनियनों का तर्क है कि जब RBI, LIC और केंद्र सरकार के कार्यालयों में पांच-दिवसीय कार्य सप्ताह लागू है, तो बैंकों में भी इसे लागू किया जाना चाहिए।
ग्राहकों पर सीधा असर
24 जनवरी (चौथा शनिवार), 25 जनवरी (रविवार) और 26 जनवरी (गणतंत्र दिवस) के बाद आज की हड़ताल—यानी चार दिन तक शाखाएं बंद—ने छोटे कारोबारियों, पेंशनधारकों और नकद लेनदेन पर निर्भर ग्राहकों को सबसे अधिक प्रभावित किया। कई जगहों पर चेक अटके रहे और काउंटर सेवाओं के अभाव में जरूरी काम टल गए।
कौन से बैंक ठप, कौन सामान्य
हड़ताल का असर मुख्य रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पर दिखा—SBI, PNB, बैंक ऑफ बड़ौदा, केनरा बैंक समेत अधिकांश सरकारी बैंक बंद रहे। दूसरी ओर, निजी क्षेत्र के बड़े बैंक जैसे HDFC बैंक, ICICI बैंक और Axis बैंक सामान्य रूप से काम करते दिखे, क्योंकि उनके कर्मचारी इस आंदोलन का हिस्सा नहीं हैं।
डिजिटल बना सहारा
राहत की बात यह रही कि नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और UPI सेवाएं सामान्य रहीं। एटीएम भी अधिकांश स्थानों पर चालू रहे, हालांकि कुछ इलाकों में नकदी की कमी की शिकायतें सामने आईं। बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे हालात में डिजिटल माध्यमों का उपयोग बढ़ता है, लेकिन शाखा-आधारित सेवाओं पर निर्भर ग्राहकों के लिए विकल्प सीमित रहते हैं।
आगे क्या?
यूनियनों ने संकेत दिए हैं कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है। वहीं सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं। फिलहाल ग्राहकों को सलाह दी गई है कि जरूरी कामों के लिए डिजिटल चैनलों का इस्तेमाल करें और अपने बैंक की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।

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