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दरभंगा राज के बाद नई विरासत की शुरुआत: कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट की कमान युवा पीढ़ी के हाथ, 108 मंदिरों के पुनरुद्धार का रोडमैप

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दरभंगा: दरभंगा राज की अंतिम महारानी कामसुंदरी देवी के निधन के साथ एक युग का अंत जरूर हुआ, लेकिन अब उसी विरासत को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नई पीढ़ी ने संभाल ली है। कामेश्वर धार्मिक न्यास ट्रस्ट की बागडोर कुमार कपिलेश्वर सिंह और राजेश्वर सिंह के हाथों में आते ही ट्रस्ट के भविष्य को लेकर बड़े फैसलों के संकेत मिलने लगे हैं। दोनों ने स्पष्ट किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता देश–विदेश में स्थित ट्रस्ट के मंदिरों और संपत्तियों का संरक्षण और जीर्णोद्धार होगी।
प्रभार ग्रहण करने के बाद कुमार कपिलेश्वर सिंह ने बताया कि कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट के अधीन कुल 108 मंदिर हैं, जो भारत के विभिन्न हिस्सों के साथ-साथ विदेशों में भी फैले हुए हैं। वाराणसी में ट्रस्ट के चार प्रमुख मंदिर हैं, जबकि पाकिस्तान और बांग्लादेश में भी इससे जुड़ी धार्मिक संपत्तियां मौजूद हैं। लंबे समय से उपेक्षा और कानूनी उलझनों के कारण इनमें से कई मंदिर जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, जिन्हें अब चरणबद्ध तरीके से पुनर्निर्मित और संरक्षित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि महारानी के निधन के बाद न्यायालय के निर्देश पर ट्रस्ट की संपत्तियों और दायित्वों का अधिकार उन्हें और उनके भाई को सौंपा गया है। ट्रस्ट को लेकर वर्षों तक चला कानूनी विवाद हाल ही में समाप्त हुआ, जिससे अब प्रशासनिक फैसले लेने का रास्ता साफ हो गया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रस्ट के कामकाज को पारदर्शी और सुव्यवस्थित ढंग से चलाया जाएगा।
राजेश्वर सिंह ने ट्रस्ट के मूल उद्देश्य की याद दिलाते हुए कहा कि स्थापना के समय मंदिरों के रखरखाव के लिए भूमि, तालाब और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए थे, ताकि उनकी आय से धार्मिक गतिविधियां और सेवाएं संचालित हो सकें। समय के साथ यह व्यवस्था कमजोर होती चली गई, लेकिन अब इसे फिर से सशक्त किया जाएगा। संसाधनों के संरक्षण और सही प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि मंदिरों की आर्थिक आत्मनिर्भरता लौट सके।
दरभंगा में इस बदलाव को केवल सत्ता हस्तांतरण नहीं, बल्कि एक नई सोच की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है—जहां परंपरा के साथ आधुनिक प्रबंधन और जवाबदेही को जोड़ा जाएगा। नई पीढ़ी के हाथों में आई यह विरासत अब यह तय करेगी कि कामेश्वर धार्मिक ट्रस्ट आने वाले वर्षों में आस्था, संरक्षण और प्रशासन का कैसा उदाहरण पेश करता है।

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