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सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस पर शिकंजा कसने की तैयारी, बिहार में नई स्वास्थ्य नीति का रोडमैप तैयार

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पटना:बिहार सरकार ने सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस को लेकर लंबे समय से चली आ रही बहस पर अब ठोस कदम बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान की गई घोषणा के बाद स्वास्थ्य विभाग ने इस दिशा में नीति निर्धारण की प्रक्रिया तेज कर दी है। इसके तहत एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है, जो सरकारी डॉक्टरों की निजी प्रैक्टिस समेत राज्य की संपूर्ण स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा कर अपनी रिपोर्ट देगी।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह पहल राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय–3’ के अंतर्गत “सुलभ स्वास्थ्य, सुरक्षित जीवन” लक्ष्य को साकार करने की दिशा में अहम मानी जा रही है। कमेटी अस्पतालों की कार्यप्रणाली, चिकित्सकों की उपस्थिति, निरीक्षण व्यवस्था और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर विस्तृत अध्ययन करेगी।

अनुभवी अधिकारियों और चिकित्सकों की टीम

गठित कमेटी की संयुक्त अध्यक्षता निदेशक प्रमुख (स्वास्थ्य सेवाएं) डॉ. रेखा झा और पीएमसीएच के अधीक्षक करेंगे। टीम में एनएमसीएच के प्राचार्य, बिहार प्रशासनिक सेवा संघ (बासा) के अध्यक्ष व महासचिव तथा आईजीआईएमएस के नेत्र विभागाध्यक्ष को भी शामिल किया गया है। यह कमेटी विभिन्न पक्षों से सुझाव लेकर एक व्यावहारिक और संतुलित नीति का मसौदा तैयार करेगी।

जमीनी स्तर पर कड़ी निगरानी के निर्देश

स्वास्थ्य सचिव लोकेश कुमार सिंह ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर जिले स्तर पर विशेष जांच टीम गठित करने को कहा है। ये टीमें मेडिकल कॉलेज अस्पतालों से लेकर सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, पीएचसी, सीएचसी और एपीएचसी तक नियमित निरीक्षण करेंगी। जांच का फोकस डॉक्टरों की उपस्थिति, सेवाओं की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं की स्थिति पर रहेगा।

दलाल तंत्र पर सख्त रुख

सरकार ने निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी संस्थानों पर भी निगरानी बढ़ाने का फैसला किया है। विभाग को सूचना मिली है कि कुछ इलाकों में दलाल मरीजों को गुमराह कर निजी संस्थानों की ओर मोड़ रहे हैं, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है। ऐसे मामलों में सख्त कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।

रिपोर्टिंग अनिवार्य, जवाबदेही तय

हर जिले के डीएम को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि जांच और कार्रवाई से जुड़ी ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ समय पर स्वास्थ्य विभाग को भेजी जाए। इससे राज्य स्तर पर निगरानी मजबूत होगी और जरूरत पड़ने पर और कठोर कदम उठाए जा सकेंगे।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित हो, मरीजों को वहीं बेहतर और पारदर्शी इलाज मिले तथा निजी प्रैक्टिस और बिचौलिया तंत्र पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सके। माना जा रहा है कि कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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