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डिरेगुलेशन फेज–2 से बिहार में प्रशासनिक सुधारों को नई रफ्तार, नियमों के सरलीकरण पर सरकार का फोकस

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पटना: बिहार में प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में पुराना सचिवालय स्थित सभागार में ‘डिरेगुलेशन फेज-2’ के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में शासन-प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया और नियमों के सरलीकरण की प्रगति तथा आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्य सचिव श्री प्रत्यय अमृत ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार प्रशासनिक सुधारों को केवल कागजों तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारने के लिए पूरी गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। उन्होंने कहा कि डिरेगुलेशन फेज-2 के तहत नियमों और प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि आम नागरिकों और व्यवसायिक संस्थानों को अनावश्यक जटिलताओं से राहत मिल सके।
मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन विभागों में अब भी पुराने, जटिल या अनुपयोगी नियम लागू हैं, उनकी पहचान कर उन्हें शीघ्र संशोधित या समाप्त किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि नियमों का सरलीकरण केवल प्रशासनिक सुविधा के लिए नहीं, बल्कि नागरिकों के विश्वास को मजबूत करने और निवेश-अनुकूल माहौल तैयार करने के लिए जरूरी है।
बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि डिरेगुलेशन प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाए और इसके परिणाम जमीन पर स्पष्ट रूप से दिखाई दें। विभागों को निर्देश दिया गया कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें, ताकि किसी भी स्तर पर अनावश्यक देरी न हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि नियमों में किए गए बदलावों की जानकारी आम लोगों और कारोबारियों तक सरल भाषा में पहुंचे।
अधिकारियों ने बताया कि डिरेगुलेशन फेज-2 के तहत लाइसेंस, अनुमति, पंजीकरण और विभिन्न प्रकार की प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि भ्रष्टाचार की संभावनाएं भी कम होंगी।
सरकार का मानना है कि “सरल नियम, सुशासन” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए यह पहल मील का पत्थर साबित होगी। डिरेगुलेशन फेज-2 के प्रभावी क्रियान्वयन से बिहार में प्रशासनिक कार्यशैली अधिक आधुनिक, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित बनेगी, जिससे विकास और निवेश को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

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