पटना। बिहार सरकार ने अपने ताजा बजट में महिलाओं और सामाजिक समूहों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में ठोस और दूरगामी रणनीति पेश की है। इस बार फोकस केवल सहायता देने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को उत्पादन, बाजार और रोजगार—तीनों से सीधे जोड़ने की स्पष्ट रूपरेखा सामने रखी गई है। सरकार का मानना है कि जब तक महिलाओं के बनाए उत्पादों को स्थायी बाजार नहीं मिलेगा, तब तक आर्थिक सशक्तिकरण अधूरा रहेगा।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत अब महिलाओं द्वारा तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए गांव से लेकर शहर तक हाट-बाजार और बिक्री केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों और महिला उद्यमियों को बिचौलियों पर निर्भर होने से मुक्त करना है, ताकि उन्हें उनके उत्पादों का सही मूल्य मिल सके और आय का स्थायी स्रोत तैयार हो। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस योजना के अंतर्गत अब तक 1.56 करोड़ से अधिक महिलाओं को रोजगारपरक गतिविधियों से जोड़ने के लिए प्रति महिला 10 हजार रुपये की सहायता दी जा चुकी है, जिससे छोटे स्तर पर शुरू हुए कई व्यवसाय अब मजबूत हो रहे हैं।
लखपति दीदी योजना से बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर
जीविका समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य में 31.71 लाख से अधिक महिलाएं अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में चिह्नित की जा चुकी हैं। यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि इस बात का संकेत है कि ग्रामीण महिलाएं अब बचत और मजदूरी तक सीमित न रहकर उद्यम और नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को और बढ़ाकर महिलाओं को स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनाना है।
हर प्रमंडल में मेगा स्किल सेंटर, फिर जिले होंगे शामिल
बजट में कौशल विकास को रोजगार से जोड़ने के लिए हब एंड स्पोक मॉडल पर आधारित मेगा स्किल सेंटर स्थापित करने का फैसला लिया गया है। पहले चरण में राज्य के सभी प्रमंडलों में एक-एक मेगा स्किल सेंटर बनाया जाएगा, जहां आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद दूसरे चरण में इस मॉडल का विस्तार सभी जिलों तक किया जाएगा। इन केंद्रों में युवाओं और महिलाओं को ऐसे कौशल सिखाए जाएंगे, जो इंडस्ट्री 4.0 के अनुरूप हों और उन्हें सीधे नौकरी के योग्य बनाएं।
आईटीआई से सीधे रोजगार तक की तैयारी
बिहार में वर्तमान में 152 आईटीआई संचालित हैं, जिनमें 38 महिला आईटीआई भी शामिल हैं। इनमें से 149 आईटीआई को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 60 आईटीआई को अपग्रेड किया गया है, जहां 7,865 प्रशिक्षणार्थियों को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रशिक्षण के बाद युवाओं को सीधे उद्योगों से जोड़ा जाए।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान नियोजन मेलों और कैंपों के माध्यम से अब तक लगभग 41,922 आवेदकों को निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर मिले हैं। रोजगार प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाने के लिए एकीकृत ई-निबंधन और रोजगार पोर्टल भी विकसित किया जा रहा है, जिससे नौकरी खोजने से लेकर नियुक्ति तक की प्रक्रिया एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी हो सके।
कुल मिलाकर, बिहार बजट में महिलाओं और युवाओं के लिए जो मॉडल सामने आया है, वह सहायता से आगे बढ़कर आत्मनिर्भरता और स्थायी रोजगार पर केंद्रित है। सरकार का दावा है कि यदि यह योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू होती हैं, तो आने वाले वर्षों में बिहार में पलायन की प्रवृत्ति कम होगी और महिलाएं आर्थिक विकास की मुख्य धारा में मजबूती से शामिल होंगी।