पटना। बिहार में शिक्षक बहाली के चौथे चरण (TRE-4) को लेकर लंबे समय से चल रही अनिश्चितता अब बड़े आंदोलन की शक्ल लेने जा रही है। 16 फरवरी को शिक्षक अभ्यर्थी पटना कॉलेज से बिहार विधानसभा तक महाआंदोलन करेंगे। इस मार्च की अगुवाई छात्र नेता दिलीप कुमार करेंगे। आयोजकों का दावा है कि इसमें राज्य के अलग-अलग जिलों से हजारों अभ्यर्थी शामिल होंगे। सवाल अब यह नहीं रह गया है कि आंदोलन होगा या नहीं, बल्कि यह है कि उससे पहले सरकार कोई ठोस फैसला लेती है या सड़कों पर दबाव और बढ़ता है।
आंदोलन के लिए पटना कॉलेज को शुरुआती बिंदु चुना जाना सिर्फ संयोग नहीं है। छात्र नेताओं का कहना है कि पटना कॉलेज छात्र आंदोलनों का ऐतिहासिक केंद्र रहा है और यहां से निकली आवाज सीधे सत्ता के गलियारों तक जाती है। विधानसभा तक मार्च का मकसद भी यही है कि शिक्षक अभ्यर्थियों की मांगों को नजरअंदाज करना सरकार के लिए आसान न रहे।
आश्वासन बनाम हकीकत का टकराव
शिक्षक अभ्यर्थियों का आरोप है कि TRE-4 को लेकर सरकार बीते कई महीनों से सिर्फ आश्वासन देती आ रही है। कभी “जल्द विज्ञापन” तो कभी “प्रक्रिया चल रही है” जैसे बयान जरूर आए, लेकिन जमीन पर अब तक कुछ भी दिखाई नहीं दिया। इसी नाराजगी ने आंदोलन को तेज किया है।
बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अभ्यर्थियों का गुस्सा खुलकर सामने आया। पोस्टरों में सरकार और सत्तारूढ़ गठबंधन के पुराने वादों को याद दिलाया गया—एक से डेढ़ लाख शिक्षकों की बहाली, महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण और TRE-4 की शीघ्र शुरुआत। अभ्यर्थियों का कहना था कि ये सभी वादे अब सिर्फ कागज और पोस्टर तक सीमित रह गए हैं।
बीपीएससी कैलेंडर बना सबसे बड़ा सवाल
छात्र नेता दिलीप कुमार ने बीपीएससी कैलेंडर 2026 को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि जब पूरे कैलेंडर में TRE-4 का कहीं उल्लेख नहीं है, तो यह स्वाभाविक है कि अभ्यर्थियों में डर और अविश्वास पैदा हो। उन्हें आशंका है कि कहीं इस साल भी बहाली प्रक्रिया टाल न दी जाए।
परीक्षाओं को देखते हुए तय की रणनीति
आंदोलन की तारीख भी रणनीतिक रूप से चुनी गई है। 15 फरवरी तक इंटर परीक्षा समाप्त हो जाएगी, जबकि 17 फरवरी से मैट्रिक परीक्षा शुरू होनी है। 16 फरवरी को आंदोलन रखकर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अभ्यर्थी छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुँचाए बिना अपनी बात रखना चाहते हैं।
दिलीप कुमार ने साफ कहा है कि अगर 15 फरवरी तक TRE-4 का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ, तो 16 फरवरी का मार्च निर्णायक मोड़ साबित होगा।
पुराने वादों की याद, नए दबाव की तैयारी
अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 16 जुलाई 2025 के उस ट्वीट को भी सामने रखा, जिसमें TRE-4 का विज्ञापन जल्द जारी करने की बात कही गई थी। महीनों गुजर जाने के बावजूद विज्ञापन न आने से नाराजगी और गहरी हो गई है। इससे पहले भी तीन बार आंदोलन हो चुके हैं, लेकिन हर बार बात आश्वासन और बातचीत तक ही सीमित रही।
‘अब आर-पार’ का मूड
शिक्षा मंत्री पर सीधे निशाना साधते हुए छात्र नेताओं का कहना है कि जनवरी में किए गए वादे भी पूरे नहीं हुए। उनका साफ संदेश है—अब तारीख या बयान नहीं, बल्कि सीधी वैकेंसी चाहिए। 16 फरवरी का मार्च सिर्फ एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार की नीयत और नीति की परीक्षा माना जा रहा है।
अब सबकी निगाहें सरकार पर टिकी हैं—क्या आंदोलन से पहले कोई बड़ा ऐलान होगा या पटना की सड़कों पर शिक्षक अभ्यर्थियों की आवाज और तेज होकर गूंजेगी।