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कुशेश्वरस्थान के हरिनगर में टकराव के बाद हालात पर काबू: शांति बैठक, गिरफ्तारियां तेज, जांच के घेरे में एफआईआर
- Reporter 12
- 05 Feb, 2026
दरभंगा जिले के कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र अंतर्गत हरिनगर गांव में 31 जनवरी को हुए दो पक्षों के बीच हिंसक विवाद का मामला अब प्रशासनिक, सामाजिक और सियासी तीनों स्तरों पर लगातार गंभीर होता जा रहा है। घटना के बाद उत्पन्न तनाव को देखते हुए आज दिनांक 05.02.2026 को वरीय पुलिस अधीक्षक दरभंगा के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बिरौल ने हरिनगर गांव में दोनों पक्षों के सदस्यों और स्थानीय गणमान्य लोगों के साथ शांति समिति की बैठक आयोजित की। बैठक में गांव की वर्तमान स्थिति, आपसी तनाव और भविष्य में किसी भी तरह की अप्रिय घटना की आशंका पर विस्तार से चर्चा की गई। एसडीपीओ ने दोनों पक्षों की बातें गंभीरता से सुनते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर शांति व्यवस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान न देने, संयम बनाए रखने और किसी भी समस्या की सूचना सीधे पुलिस को देने की अपील की।इस बीच, मामले की कानूनी प्रक्रिया भी तेजी से आगे बढ़ रही है। पीड़ित पक्ष की ओर से अनुसूचित जाति-जनजाति थाना में दर्ज प्राथमिकी में 70 नामजद और 100 से 150 अज्ञात लोगों को आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने अब तक इस मामले में 17 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। हालांकि जांच के दौरान पुलिस के सामने एक अहम पहलू सामने आया है, जिसमें यह आशंका जताई जा रही है कि एफआईआर में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शामिल कर दिए गए हैं, जो घटना के समय गांव में मौजूद ही नहीं थे और दिल्ली समेत अन्य राज्यों में रहकर नौकरी कर रहे हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि प्राथमिकी में बड़ी संख्या में एक ही समाज के लोगों को आरोपी बनाए जाने के कारण अब मामले की निष्पक्षता और तथ्यों की गहराई से जांच की जा रही है ताकि निर्दोषों को फंसाए जाने की आशंका को दूर किया जा सके।इस घटना को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है। बुधवार को अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग के अध्यक्ष मृणाल पासवान दरभंगा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने मारपीट में घायल पीड़ितों से मुलाकात कर उनके इलाज की स्थिति जानी। इसके बाद उन्होंने जिला कल्याण पदाधिकारी से बातचीत कर पीड़ित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा दिलाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा की। आयोग अध्यक्ष ने कहा कि पीड़ितों को न्याय दिलाना प्राथमिकता है, लेकिन साथ ही निष्पक्ष जांच भी उतनी ही जरूरी है।पीड़ित पक्ष की ओर से विक्रम पासवान ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि वह सब्जी खरीदकर घर लौट रहे थे, तभी गांव के कुछ लोगों ने जातिसूचक गालियां देते हुए उन पर सुनियोजित तरीके से हमला कर दिया। आरोप है कि हमलावर लाठी-डंडा, लोहे की रॉड, फरसा, दबिया और ईंट-पत्थर से लैस थे और एक राय होकर हमला किया गया, जिसमें कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वहीं दूसरी ओर गांव के कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि विवाद की शुरुआत मामूली पैसे के लेन-देन से हुई थी, जिसे बाद में गलत दिशा में मोड़ दिया गया। उनका आरोप है कि प्राथमिकी में वास्तविक दोषियों को छोड़कर कई निर्दोष ग्रामीणों को भी नामजद कर दिया गया है, जिससे गांव में डर और असंतोष का माहौल बन गया है।फिलहाल पुलिस प्रशासन का कहना है कि मामले की जांच पूरी निष्पक्षता के साथ की जा रही है, साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई होगी और दोषी चाहे जिस पक्ष का हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा, वहीं निर्दोषों को राहत दिलाने का भी भरोसा दिया गया है।
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