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सुप्रीम कोर्ट ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 चुनौती याचिका पर पटना हाई कोर्ट जाने की दी सलाह

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नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को चुनौती देने वाली जन सुराज पार्टी की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि चुनाव के दौरान महिलाओं को आचार संहिता के उल्लंघन के रूप में 10-10 हजार रुपये दिए गए, जिससे चुनाव में अनियमितता हुई।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरा चुनाव रद्द करने की मांग को अनुचित बताया और याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह राशि मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत दी गई थी, जो महिलाओं को आर्थिक सहायता और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से डिज़ाइन की गई है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, ऐसे वित्तीय सहायता के वितरण को चुनाव परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव डालने वाला नहीं माना जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जन सुराज की ओर से किए गए आरोपों में कोई सीधा प्रमाण नहीं है जो पूरे चुनाव को रद्द करने योग्य ठहराए।
मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना का महत्व
बिहार सरकार ने महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके छोटे व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना लागू की थी। इसके तहत पहले चरण में 1 करोड़ 56 लाख परिवारों की महिलाओं को 10-10 हजार रुपये सीधे उनके बैंक खातों में हस्तांतरित किए गए थे। योजना का अगला चरण और भी व्यापक है, जिसमें पात्र महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जाएगी, ताकि वे स्वयं का रोजगार या व्यवसाय स्थापित कर सकें।
चुनाव परिणाम और जन सुराज पार्टी की प्रतिक्रिया
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए गठबंधन ने 243 सीटों में से 202 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया। इसके परिणामस्वरूप नीतीश कुमार ने पांचवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। चुनाव में बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि जेडीयू ने दूसरे स्थान पर कब्ज़ा किया। महागठबंधन को 35–37 सीटें ही मिलीं।
जन सुराज पार्टी ने पूरे चुनाव में 239 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, लेकिन केवल 3.34% वोट हासिल कर सकी और कोई सीट नहीं जीत सकी। पार्टी ने चुनाव परिणामों को लेकर निराशा जताई, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अब वे पटना हाई कोर्ट में अगली कानूनी कार्रवाई की तैयारी में हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय से यह स्पष्ट हुआ कि सरकारी योजनाओं के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता को चुनाव परिणामों पर प्रभाव डालने वाली अनुचित गतिविधि नहीं माना जाएगा, और आगे की कानूनी प्रक्रिया राज्य हाई कोर्ट के माध्यम से पूरी होगी।

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