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बजट सत्र का सातवां दिन गरमाया: महिला सुरक्षा, अपराध और आवास योजना पर सरकार घिरी; सदन के बाहर विपक्ष का प्रदर्शन

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पटना। बिहार विधानसभा के बजट सत्र का सातवां दिन भी तीखे राजनीतिक टकराव और हंगामे के बीच शुरू हुआ। एक ओर विपक्षी दल लगातार बढ़ते अपराध, महिला सुरक्षा और विकास योजनाओं में देरी को लेकर सरकार पर हमलावर हैं, वहीं दोपहर में वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट पर चर्चा से पहले सदन के बाहर राजद, कांग्रेस और वाम दलों के विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन कर माहौल और गर्म कर दिया।
भाकपा (माले) विधायक संदीप सौरभ ने विधानसभा परिसर के बाहर सरकार को घेरते हुए कहा कि हाल के दिनों में बेटियों के खिलाफ अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं, जिससे पूरे राज्य में भय का माहौल बन गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट छात्रा हत्याकांड के बाद भी सरकार स्थिति संभालने में विफल रही है और अब अभिभावक अपनी बेटियों को पढ़ाई के लिए शहर भेजने से डर रहे हैं। उन्होंने घोषणा की कि इस मुद्दे पर सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव लाया जाएगा।
इधर सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रश्नोत्तर काल के दौरान भी विपक्ष ने सरकार को घेरने का प्रयास किया। विधायक अमरेंद्र कुमार ने ग्रामीण विकास विभाग से सवाल करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत लाखों घर अब भी अधूरे पड़े हैं और वित्तीय वर्ष खत्म होने में बहुत कम समय बचा है। उन्होंने पूछा कि केंद्र से कितनी राशि मिली और लाभुकों को शेष किश्त कब तक मिलेगी। जवाब में मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि केंद्र से राशि की मांग की जा चुकी है और प्रक्रिया के तहत जल्द फंड मिलने की उम्मीद है, ताकि निर्माण कार्य पूरा कराया जा सके।
विधानसभा परिसर में महागठबंधन के विधायकों ने बढ़ते अपराध और महिला सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। राजद नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार अपराध नियंत्रण में विफल रही है और ध्यान भटकाने के लिए एनकाउंटर की घटनाओं को प्रचारित कर रही है। राजद विधायक भाई वीरेंद्र ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस कार्रवाई में पक्षपात हो रहा है और एक विशेष जाति को निशाना बनाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है।
उधर सत्ता पक्ष ने इन आरोपों को राजनीतिक बताया और कहा कि विपक्ष जानबूझकर सत्र को बाधित कर विकास और बजट से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों से ध्यान भटकाना चाहता है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा समेत सरकार के सभी मंत्री सदन में मौजूद रहे, जबकि नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की अनुपस्थिति भी चर्चा का विषय बनी रही।
अब सभी की निगाहें दोपहर में होने वाली बजट चर्चा पर टिकी हैं, जहां उम्मीद है कि सरकार अपनी प्राथमिकताओं और योजनाओं का रोडमैप पेश करेगी, जबकि विपक्ष राज्य की कानून-व्यवस्था और विकास कार्यों पर सरकार को कठघरे में खड़ा करने की रणनीति तैयार कर चुका है।

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