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नवादा में हैरान करने वाला मामला: सिर फटने पर टांके की जगह स्टेपल पिन लगा दिया, वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग हरकत में

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नवादा। बिहार के नवादा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और झोलाछाप डॉक्टरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिले के वारसलीगंज थाना क्षेत्र के नारोमुरार गांव में एक युवक के सिर में चोट लगने के बाद कथित तौर पर एक झोलाछाप डॉक्टर द्वारा टांके लगाने की जगह स्टेपल पिन लगा देने का मामला सामने आया है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल बन गया है।
बताया जा रहा है कि नारोमुरार गांव के मुसहरी गणेश नगर इलाके में होलिका दहन के दिन यानी 2 मार्च को किसी बात को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया था। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और मारपीट की नौबत आ गई। इस झड़प में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें सबसे अधिक चोट हरेंद्र पासवान के सिर में लगी थी।
घटना के बाद ग्रामीणों और परिजनों ने घायल लोगों को इलाज के लिए पास के एक स्थानीय डॉक्टर के पास पहुंचाया। आरोप है कि वहां मौजूद डॉक्टर ने घाव की गंभीरता को देखते हुए अस्पताल भेजने के बजाय खुद ही इलाज शुरू कर दिया। परिजनों के अनुसार सिर में लगे गहरे घाव को सिलाई यानी टांका लगाने के बजाय स्टेपल पिन से बंद कर दिया गया।
घायल युवक हरेंद्र पासवान ने बताया कि मारपीट की घटना के बाद गांव के कुछ लोगों ने समझौता करवा दिया था। इसके बाद इलाज के लिए उन्हें और उनके परिजनों को गांव के डॉक्टर के पास ले जाया गया। वहां उनके सिर में टांके लगाने के बजाय पिन लगा दी गई।
घटना में हरेंद्र पासवान के अलावा उनके भाई ललन पासवान और पिता अर्जुन पासवान भी घायल हुए थे। बताया जा रहा है कि तीनों के सिर में पिन लगाई गई थी। इनमें से दो लोगों की पिन बाद में निकाल दी गई, जबकि एक घायल के सिर में अभी भी पिन लगी होने की बात सामने आई है।
जब इस पूरे मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया तो लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कई लोग इसे गंभीर लापरवाही बता रहे हैं और झोलाछाप डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
हालांकि इस मामले में कुछ मेडिकल विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति में “सर्जिकल स्किन स्टेपलर” नामक उपकरण का इस्तेमाल भी किया जाता है, जिसके माध्यम से घाव को जल्दी बंद किया जाता है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस तकनीक का उपयोग बहुत कम होता है, इसलिए लोगों को यह तरीका असामान्य लग रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि घायल युवक के सिर में जो पिन लगाई गई है वह वास्तव में चिकित्सकीय सर्जिकल स्टेपलर से लगाई गई है या सामान्य स्टेशनरी स्टेपलर का इस्तेमाल किया गया है। फिलहाल इस बात की स्पष्ट पुष्टि नहीं हो पाई है।
घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग भी सक्रिय हो गया है। नवादा के सिविल सर्जन ने कहा है कि मामले की जानकारी मिलने के बाद इसकी जांच के आदेश दिए गए हैं। वारसलीगंज पीएचसी के प्रभारी को पीड़ित के गांव जाकर पूरे मामले की जांच करने और कथित डॉक्टर की पहचान करने का निर्देश दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि बिना अनुमति के इलाज किया गया या गलत तरीके से चिकित्सा की गई है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टरों के बढ़ते प्रभाव और लोगों की मजबूरी पर भी चर्चा तेज हो गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गंभीर चोट लगने की स्थिति में मरीज को तुरंत किसी मान्यता प्राप्त अस्पताल या प्रशिक्षित डॉक्टर के पास ले जाना चाहिए।
फिलहाल वायरल वीडियो के बाद प्रशासनिक जांच शुरू हो चुकी है और लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

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