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बिहार में राज्यसभा चुनाव से पहले तेजस्वी यादव ने राजद विधायकों को होटल में रखा, क्रॉस वोटिंग रोकने की तैयारी

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पटना: बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘रिजॉर्ट पॉलिटिक्स’ ने दस्तक दी है। राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने अपने सभी विधायकों को एक होटल में एकत्रित कर रखा है। इस कदम से यह संकेत मिलता है कि पार्टी किसी भी संभावित क्रॉस वोटिंग या विधायकों के पलट जाने की संभावना को रोकने के लिए पूरी तरह सजग है।
सूत्रों के अनुसार, 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव के मद्देनजर तेजस्वी यादव ने अपने सभी विधायकों को पटना के एक होटल में ठहराया है। पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विधायक होटल से बाहर नहीं जाएंगे और चुनाव प्रक्रिया के दौरान पूरी तरह एकजुट रहेंगे। जिन विधायकों ने अभी तक होटल में प्रवेश नहीं किया है, उन्हें भी तत्काल वहां पहुंचाया जाएगा।
राजद का यह कदम किसी भी प्रकार की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग को रोकने के लिए उठाया गया है। राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी गलियारों में इस कदम को राजनीतिक सुरक्षा और पार्टी एकता बनाए रखने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
वहीं, भाजपा, जदयू और लोजपा (रामविलास) ने भी अपने-अपने विधायकों के लिए व्हिप जारी किया है। सभी राजनीतिक दल अपने विधायकों को एकजुट रखने और चुनाव में अपने उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करने में पूरी तरह जुटे हैं। इसके चलते बिहार की सियासत में हलचल और तेज हो गई है।
राजद के पूर्व विधायक शक्ति सिंह ने इस संबंध में कहा कि भाजपा ने पांचवें उम्मीदवार को मैदान में उतारकर इस चुनाव में अपना दबदबा दिखाने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि भाजपा के भरोसे से कि वे धनबल और तंत्र बल से चुनाव जीत लेंगे, यह योजना असफल होगी। उन्होंने बताया कि राजद विधायक इस दौरान एक साथ बैठकर यह तय कर रहे हैं कि वोटिंग के समय किस प्रकार मतदान किया जाए। इस प्रक्रिया के दौरान पार्टी द्वारा विधायकों के फोन को नियंत्रित किया जा रहा है और उन्हें किसी बाहरी संपर्क से दूर रखा गया है, ताकि किसी भी प्रकार का दबाव या क्रॉस वोटिंग न हो।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस प्रकार की रणनीति बिहार में राज्यसभा चुनावों के दौरान सामान्य होती जा रही है, क्योंकि छोटे मतों वाले चुनाव में किसी भी एक विधायक का रुख निर्णायक साबित हो सकता है। तेजस्वी यादव का यह कदम अपने विधायकों को एकजुट रखकर चुनाव में अपनी स्थिति मजबूत करने की स्पष्ट कोशिश है।
इस बीच, पार्टी नेताओं और विधायकों ने भी इस रणनीति का समर्थन किया है। उनका कहना है कि चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए इस तरह की सख्त तैयारी जरूरी है, और राजद इस बार विधायकों की पूरी एकता दिखाने के लिए प्रतिबद्ध है।
बिहार में 16 मार्च को राज्यसभा चुनाव के दौरान यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या तेजस्वी यादव की यह रणनीति क्रॉस वोटिंग को रोकने में सफल होती है या नहीं।

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