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रिजल्ट से पहले साइबर ठग सक्रिय: बिहार में ‘पास कराने’ के नाम पर वसूली का खेल, मधेपुरा से सामने आया मामला
- Reporter 12
- 22 Mar, 2026
छात्रा की पूरी जानकारी बताकर मांगे 4 हजार रुपये; वायरल ऑडियो से बढ़ी चिंता, पहले भी आ चुके हैं ऐसे कई मामले
पटना/मधेपुरा: बिहार में बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित होने से पहले ही साइबर ठगों की सक्रियता ने अभिभावकों और छात्रों की चिंता बढ़ा दी है। ताजा मामला मधेपुरा जिले से सामने आया है, जहां एक परिवार को फोन कर उनकी बेटी को परीक्षा में पास कराने के नाम पर पैसों की मांग की गई। इस घटना ने न केवल लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और डेटा सुरक्षा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्वालपाड़ा प्रखंड के एक परिवार को एक अज्ञात व्यक्ति का फोन आया, जिसने खुद को बिहार विद्यालय परीक्षा समिति, पटना का कर्मचारी बताया। कॉल करने वाले ने बेहद आत्मविश्वास के साथ छात्रा का नाम, उसके माता-पिता का नाम और परीक्षा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी साझा की, जिससे परिजन कुछ देर के लिए उसकी बातों पर विश्वास करने लगे।
फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम गौरव कुमार सिंह बताया और साफ तौर पर कहा कि यदि परिवार 4000 रुपये दे देता है, तो छात्रा को परीक्षा में पास करा दिया जाएगा। उसने यह भी चेतावनी दी कि पैसे नहीं देने की स्थिति में छात्रा को फेल कर दिया जाएगा। इस तरह की सीधी धमकी और पैसों की मांग ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया।
हैरान करने वाली बात यह रही कि कॉल करने वाले ने परिजनों से अपना नंबर सेव करने और रिजल्ट आने के बाद दोबारा संपर्क करने की बात भी कही। इससे यह संदेह और गहरा हो गया कि यह कोई सुनियोजित ठगी का नेटवर्क हो सकता है, जो परीक्षा परिणाम से पहले लोगों को निशाना बना रहा है।
इस घटना का एक ऑडियो भी सामने आया है, जो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। हालांकि, इस ऑडियो की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इसमें कथित तौर पर कॉल करने वाला व्यक्ति बेहद सहज अंदाज में पैसे की मांग करता हुआ सुनाई देता है।
इस मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं। पहला, यदि कॉल करने वाला वास्तव में किसी सरकारी संस्था से जुड़ा है, तो वह इतनी खुलेआम रिश्वत कैसे मांग सकता है? और दूसरा, अगर यह साइबर ठग है, तो उसके पास छात्रा की इतनी सटीक जानकारी कैसे पहुंची?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला डेटा लीक या साइबर सुरक्षा में खामी की ओर इशारा करता है। जब किसी ठग के पास छात्र का नाम, रोल नंबर, विषय और पारिवारिक जानकारी तक पहुंच जाती है, तो आम लोग आसानी से उसके झांसे में आ सकते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह का मामला सामने आया हो। इससे पहले भी भोजपुर जिले से एक ऐसा ही मामला सामने आया था, जहां एक युवक को फोन कर उसकी बहन को पास कराने के नाम पर पैसे मांगे गए थे।
उस कॉल में भी ठग ने खुद को बोर्ड का कर्मचारी बताते हुए छात्रा की पूरी जानकारी दी थी और कहा था कि वह कुछ विषयों में फेल हो रही है। उसने पैसे देने पर फर्स्ट डिवीजन से पास कराने का दावा किया और ऑनलाइन भुगतान की मांग की। उस घटना का ऑडियो भी सामने आया था, जिसमें ठग की बातचीत से यह साफ जाहिर हो रहा था कि वह लोगों को भ्रमित कर ठगी करने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे मामलों के सामने आने के बाद अभिभावकों और छात्रों के बीच डर और भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है। परीक्षा परिणाम जैसे संवेदनशील समय में लोग अधिक चिंतित रहते हैं और इसी मनोस्थिति का फायदा उठाकर ठग उन्हें अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं।
प्रशासन और साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बोर्ड या सरकारी संस्था द्वारा इस तरह फोन कर पैसे मांगने की कोई व्यवस्था नहीं होती है। परीक्षा का परिणाम पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया के तहत तैयार किया जाता है, जिसमें किसी प्रकार की बाहरी दखल की कोई गुंजाइश नहीं होती।
ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान कॉल पर विश्वास न करें, खासकर जब वह पैसे की मांग कर रहा हो। अगर कोई खुद को सरकारी अधिकारी बताकर इस तरह की बात करता है, तो उसकी जानकारी संबंधित विभाग या पुलिस को तुरंत दें।
इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि साइबर सुरक्षा को और मजबूत किया जाए, ताकि छात्रों की निजी जानकारी गलत हाथों में न पहुंचे। डेटा की सुरक्षा सुनिश्चित करना आज के डिजिटल दौर में सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी है।
कुल मिलाकर, बिहार में बोर्ड रिजल्ट से पहले सक्रिय हुए साइबर ठग एक गंभीर समस्या बनते जा रहे हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है। अभिभावकों और छात्रों को चाहिए कि वे किसी भी तरह के लालच या डर में आकर कोई कदम न उठाएं और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें।
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