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दुलारचंद हत्याकांड में अनंत सिंह को जमानत, 4 महीने बाद जेल से रिहाई; मोकामा में रोड शो से करेंगे शक्ति प्रदर्शन

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पटना/मोकामा: मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को दुलारचंद यादव हत्याकांड में राहत मिल गई है। पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे सोमवार को जेल से रिहा होंगे। करीब चार महीने बाद उनकी रिहाई होने जा रही है, जिसे लेकर उनके समर्थकों में खासा उत्साह देखा जा रहा है। जानकारी के अनुसार जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह सीधे अपने पटना स्थित विधायक आवास जाएंगे, जहां समर्थकों के जुटने की संभावना है।
रिहाई के अगले ही दिन यानी मंगलवार, 24 मार्च को अनंत सिंह अपने विधानसभा क्षेत्र में शक्ति प्रदर्शन करने की तैयारी में हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत वे बाढ़ से लेकर बड़हिया महारानी स्थान मंदिर तक सड़क मार्ग से रोड शो करेंगे। इस दौरान मोकामा होते हुए उनका काफिला गुजरेगा। राजनीतिक तौर पर इस रोड शो को उनकी वापसी के बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
गौरतलब है कि 30 अक्टूबर 2025 को मोकामा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी माहौल के बीच दुलारचंद यादव की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अनंत सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। इसके बाद 1 नवंबर 2025 को पटना पुलिस ने उन्हें बाढ़ के लदमा स्थित उनके आवास से गिरफ्तार कर लिया था। तब से वे न्यायिक हिरासत में थे और अब जाकर उन्हें जमानत मिली है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति रुद्र प्रकाश मिश्रा की एकलपीठ ने कुछ शर्तों के साथ जमानत मंजूर की है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि अनंत सिंह किसी भी तरह से केस के गवाहों या सूचक को प्रभावित करने की कोशिश करते हैं या उन्हें धमकाते हैं, तो उनकी जमानत तत्काल रद्द कर दी जाएगी। इसके अलावा कोर्ट में सुनवाई के दौरान उनकी उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी।
इस मामले में कई तथ्य ऐसे भी सामने आए हैं, जो जांच और आरोपों के बीच सवाल खड़े करते हैं। आरोप था कि अनंत सिंह ने दुलारचंद यादव को गोली मारी थी, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण कुछ और ही बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार मृतक के शरीर पर कई गंभीर चोटों के निशान थे, जिनमें लाठी से पिटाई और वाहन से कुचलने जैसी बातें सामने आईं। फेफड़ों के फटने और पसलियों के टूटने की वजह से अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव को मौत की वजह माना गया। ऐसे में केवल गोली लगने से मौत की बात स्पष्ट नहीं हो पाई।
वहीं पुलिस के कुछ बयानों में भी घटनास्थल पर अनंत सिंह की मौजूदगी को लेकर स्पष्ट पुष्टि नहीं की गई थी, जिससे मामले की जटिलता और बढ़ गई। हालांकि केस अभी न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला आना बाकी है।
राजनीतिक दृष्टिकोण से देखें तो अनंत सिंह की वापसी काफी अहम मानी जा रही है। गिरफ्तारी के बावजूद उन्होंने मोकामा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर अपनी पकड़ साबित की थी। उन्होंने राजद उम्मीदवार वीणा देवी को बड़े अंतर से हराया था, जो यह दर्शाता है कि क्षेत्र में उनका जनाधार अभी भी मजबूत है।
अब रिहाई के बाद उनका रोड शो और सक्रियता यह संकेत दे रही है कि वे एक बार फिर पूरी ताकत के साथ राजनीति में सक्रिय होने जा रहे हैं। आने वाले दिनों में उनकी गतिविधियों पर न केवल समर्थकों, बल्कि विरोधियों और राजनीतिक विश्लेषकों की भी नजर रहेगी।
कुल मिलाकर, अनंत सिंह की जमानत और रिहाई ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि कोर्ट की शर्तों के दायरे में रहते हुए वे किस तरह अपनी राजनीतिक पारी को आगे बढ़ाते हैं और मोकामा समेत पूरे क्षेत्र में अपनी मौजूदगी को कैसे मजबूत करते हैं।

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