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पटना: बिहार दिवस समारोह में सोना महापात्रा का जादू, गांधी मैदान में गीतों पर झूमे हजारों लोग
- Reporter 12
- 23 Mar, 2026
रुपैया” से शुरुआत, छठ गीत और भोजपुरी अंदाज ने बांधा समां; दो घंटे तक चला यादगार संगीत कार्यक्रम
पटना: बिहार के 114वें स्थापना दिवस के अवसर पर राजधानी पटना का ऐतिहासिक गांधी मैदान रविवार की शाम संगीत के रंग में पूरी तरह रंगा नजर आया। तीन दिवसीय बिहार दिवस समारोह के पहले दिन मशहूर बॉलीवुड गायिका सोना महापात्रा ने अपनी दमदार प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जैसे ही उन्होंने मंच संभाला, पूरा मैदान तालियों की गूंज और उत्साह से भर उठा।
कार्यक्रम की शुरुआत शाम करीब साढ़े सात बजे हुई और रात लगभग साढ़े नौ बजे तक चलता रहा। इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक एक-एक गीत पर झूमते नजर आए। सोना महापात्रा ने अपने चर्चित सिग्नेचर गीत “रुपैया” से कार्यक्रम का आगाज किया, जिसने शुरुआत से ही माहौल को जोश से भर दिया। इसके बाद उन्होंने “जिया लागे ना” जैसे लोकप्रिय गीत पेश कर श्रोताओं को भावनाओं से जोड़ दिया।
कार्यक्रम के दौरान दर्शकों का उत्साह लगातार बढ़ता गया। हर गीत के साथ लोगों की ऊर्जा और तालियों की गूंज तेज होती चली गई। सोना महापात्रा ने न सिर्फ बॉलीवुड के हिट गाने गाए, बल्कि बिहार की लोक संस्कृति को भी अपने अंदाज में मंच पर उतारा।
उन्होंने दर्शकों से भोजपुरी में संवाद कर खास जुड़ाव स्थापित किया। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि पटना से उनका पुराना रिश्ता रहा है और यहां के लोगों का प्यार उन्हें हमेशा याद रहता है। करीब एक दशक पहले के अपने अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि इस बार भी उन्हें वही अपनापन और गर्मजोशी महसूस हो रही है।
संगीत कार्यक्रम के बीच उन्होंने बिहार की परंपराओं को सम्मान देते हुए लोकगीतों की प्रस्तुति भी दी। खास तौर पर छठ पर्व से जुड़े गीत “उगहे सूरज देव” को गाकर उन्होंने पूरे माहौल को भक्तिमय बना दिया। इस गीत के दौरान दर्शकों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिला और कई लोग भावुक भी नजर आए।
इसके साथ ही उन्होंने अपने गृह राज्य ओडिशा के लोकगीतों को भी मंच पर प्रस्तुत किया, जिससे कार्यक्रम में सांस्कृतिक विविधता और अधिक निखर कर सामने आई। नवरात्र के संदर्भ में मां दुर्गा को समर्पित गीतों ने भी दर्शकों को आध्यात्मिक रंग में रंग दिया।
सोना महापात्रा ने अपने कार्यक्रम के दौरान बिहार की सांस्कृतिक धरोहर की भी खुलकर सराहना की। उन्होंने बताया कि दिन में उन्होंने बिहार म्यूजियम का भ्रमण किया और इसकी भव्यता से काफी प्रभावित हुईं। उन्होंने इसे देश के बेहतरीन संग्रहालयों में से एक बताया। साथ ही प्राचीन इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि बिहार में सदियों पहले भी महिलाओं की भूमिका महत्वपूर्ण रही है, जिसके प्रमाण ऐतिहासिक अवशेषों में देखने को मिलते हैं।
उन्होंने बिहार के लोकगीतों और लोकनाट्य परंपरा की भी तारीफ की। खासतौर पर भिखारी ठाकुर के योगदान को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनका काम अतुलनीय है और भारतीय रंगमंच में उनका स्थान बेहद महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के दौरान जब उन्होंने “मेरे रश्के कमर” गाया, तो दर्शक खुद को थिरकने से रोक नहीं सके। वहीं भोजपुरी गीत “रेलिया बैरन पिया को लिए जाए रे” ने पूरे माहौल में देसी रंग भर दिया। इसके अलावा “अंबरसरिया” और अन्य कई लोकप्रिय गीतों की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को और भी यादगार बना दिया।
सिर्फ संगीत ही नहीं, बल्कि बिहार के खान-पान का जिक्र भी इस कार्यक्रम में खास रहा। सोना महापात्रा ने बताया कि उन्होंने यहां आकर लिट्टी-चोखा का स्वाद चखा और उन्हें यह व्यंजन बेहद पसंद आया। उन्होंने दर्शकों से आग्रह किया कि वे सोशल मीडिया पर उन्हें बिहार के अन्य पारंपरिक व्यंजनों के बारे में जरूर बताएं।
उन्होंने यह भी बताया कि अपने प्रवास के दौरान वे पटना के प्रसिद्ध मंदिरों में दर्शन करने जाएंगी और यहां की धार्मिक परंपराओं को करीब से समझेंगी।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने दर्शकों को बिहार दिवस की शुभकामनाएं दीं और अपने अंतिम गीत “लैला मैं लैला” के साथ समापन किया। इस आखिरी प्रस्तुति के दौरान पूरा गांधी मैदान झूम उठा और लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम के समापन पर बिहार सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोना महापात्रा और उनकी टीम को सम्मानित किया। उन्हें मोमेंटो भेंट कर उनके शानदार प्रदर्शन के लिए धन्यवाद दिया गया।
बिहार दिवस के इस भव्य आयोजन का यह पहला दिन था, जिसने दर्शकों को संगीत और संस्कृति का शानदार अनुभव दिया। अब लोगों को दूसरे दिन का इंतजार है, जब मशहूर गायक शान अपनी प्रस्तुति से गांधी मैदान को सुरों से सराबोर करेंगे।
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