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पटना: गंगा पथ एक्सटेंशन से ट्रैफिक में आएगी क्रांति, दीघा से कोईलवर तक बनेगा 36 किमी फोरलेन
- Reporter 12
- 23 Mar, 2026
6500 करोड़ की परियोजना से आधे घंटे में पूरा होगा सफर, आरा-बक्सर समेत कई जिलों को मिलेगी सीधी कनेक्टिविटी
पटना: बिहार की राजधानी पटना में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और परिवहन नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। शहर की जीवनरेखा माने जाने वाले जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) का विस्तार अब दीघा से कोईलवर तक किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद राजधानी और आसपास के जिलों के बीच यात्रा का स्वरूप पूरी तरह बदलने की उम्मीद है।
इस परियोजना के तहत करीब 36 किलोमीटर लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण किया जा रहा है, जिसकी अनुमानित लागत लगभग 6500 करोड़ रुपये है। सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और इसे तय समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि यह परियोजना न केवल पटना शहर के ट्रैफिक दबाव को कम करेगी, बल्कि उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच संपर्क को भी बेहद सुगम बना देगी।
वर्तमान में पटना से कोईलवर या उससे आगे के जिलों में जाने के लिए लोगों को मनेर और बिहटा के रास्ते पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग का सहारा लेना पड़ता है, जहां अक्सर लंबा जाम लगा रहता है। इस कारण कई बार डेढ़ से दो घंटे का समय लग जाता है। लेकिन गंगा पथ एक्सटेंशन के पूरा होने के बाद यही दूरी महज 30 मिनट में तय की जा सकेगी।
इस सड़क की खास बात यह है कि इसे आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। परियोजना का निर्माण ‘हाइब्रिड एनवीटी मॉडल’ पर किया जा रहा है, जो बिहार में इस तरह की पहली बड़ी परियोजना मानी जा रही है। इस मॉडल के तहत निर्माण एजेंसी को सड़क बनाने के साथ-साथ आने वाले 15 वर्षों तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी निभानी होगी। इससे सड़क की गुणवत्ता और दीर्घकालिक उपयोगिता सुनिश्चित की जाएगी।
परियोजना के तकनीकी स्वरूप की बात करें तो कुल 36 किलोमीटर की लंबाई में से करीब 18 किलोमीटर हिस्सा एलिवेटेड होगा, यानी यह जमीन से ऊपर बनाया जाएगा। वहीं बाकी 18 किलोमीटर हिस्सा जमीन के स्तर पर, यानी एटग्रेड बनेगा। इस तरह की संरचना से बाढ़ या जलजमाव की स्थिति में भी यातायात बाधित नहीं होगा।
यह सड़क दीघा स्थित जेपी सेतु के पास से शुरू होकर शेरपुर और बिहटा होते हुए सीधे कोईलवर के नए पुल से जुड़ेगी। इस मार्ग के चालू होने के बाद पटना के पश्चिमी हिस्से के साथ-साथ आरा, बक्सर और आसपास के जिलों तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
इस परियोजना का प्रभाव सिर्फ पटना तक सीमित नहीं रहेगा। शेरपुर के पास इस सड़क को प्रस्तावित छह लेन पुल से जोड़ा जाएगा, जिससे वैशाली और मुजफ्फरपुर जैसे जिलों के लोगों को भी बड़ा फायदा मिलेगा। इन जिलों से आने-जाने वाले वाहन बिना शहर के भीड़भाड़ वाले इलाकों में प्रवेश किए सीधे अपने गंतव्य तक पहुंच सकेंगे।
इससे पटना के प्रमुख व्यावसायिक और प्रशासनिक इलाकों—जैसे बेली रोड, बोरिंग रोड और गांधी मैदान—पर वाहनों का दबाव काफी कम होने की उम्मीद है। ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे शहरवासियों के लिए यह परियोजना किसी बड़ी राहत से कम नहीं होगी।
परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेजी से पूरी की जा रही है। करीब 32 किलोमीटर क्षेत्र में जमीन अधिग्रहण का कार्य पूरा हो चुका है, जबकि शेष हिस्सों में भी प्रक्रिया जारी है। सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने के लिए लगभग चार वर्षों की समय सीमा निर्धारित की है।
इस सड़क के निर्माण से न केवल यात्रा का समय घटेगा, बल्कि ईंधन की बचत भी होगी और प्रदूषण में कमी आएगी। इसके साथ ही व्यापार और परिवहन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की आधुनिक सड़क परियोजनाएं किसी भी राज्य के विकास में अहम भूमिका निभाती हैं। बेहतर कनेक्टिविटी से उद्योगों को बढ़ावा मिलता है, नए निवेश आते हैं और रोजगार के अवसर भी बढ़ते हैं।
गंगा पथ एक्सटेंशन परियोजना को बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके पूरा होने के बाद पटना न केवल एक बेहतर कनेक्टिविटी वाला शहर बनेगा, बल्कि यह पूरे राज्य के लिए विकास का नया मॉडल भी प्रस्तुत करेगा।
कुल मिलाकर यह परियोजना बिहार के परिवहन तंत्र को नई दिशा देने वाली साबित हो सकती है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह काम तय समय के भीतर पूरा होता है या नहीं, क्योंकि इसके पूरा होते ही लाखों लोगों की दैनिक जिंदगी आसान हो जाएगी और पटना की ट्रैफिक व्यवस्था में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।
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