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देश के महत्वपूर्ण स्थानों की तस्वीरें पाकिस्तान भेजने वाले जासूसी गिरोह का खुलासा

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नई दिल्ली। देश की सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जो भारत के संवेदनशील और महत्वपूर्ण स्थानों की फोटो और वीडियो पाकिस्तान भेज रहा था। सुरक्षा एजेंसियों की पूछताछ में यह खुलासा हुआ है कि इस गिरोह के तीन प्रमुख आरोपियों के खातों में लगभग 45 लाख रुपये की विदेशी फंडिंग पाई गई। प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला कि पाकिस्तान से नेपाल के हवाला कारोबारियों के जरिए गिरोह को धनराशि भेजी जा रही थी।
जांच के दौरान सामने आया कि नेपाल निवासी गणेश, जो गुल्मी और लुम्बिनी का रहने वाला है, इस नेटवर्क में अहम भूमिका निभा रहा था। उसके जरिए पाकिस्तान से भेजी गई रकम नेपाल में विभिन्न व्यवसायों जैसे कि कसीनो, मोबाइल और कपड़ों की दुकानों के खातों में ट्रांसफर की जाती थी। इसके बाद गिरोह के सदस्यों तक यह राशि 20 से 25 प्रतिशत कमीशन पर नकद या खातों के माध्यम से पहुंचाई जाती थी।
डीसीपी सिटी, धवल जयसवाल ने कहा कि आरोपियों के खातों की विस्तृत जांच में कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो पूरे नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं। जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान से जुड़े जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर और पाकिस्तानी गैंगस्टर सरफराज उर्फ सरदार उर्फ जोरा सिंह ने मेरठ निवासी मुख्य आरोपी सुहेल मलिक और पकड़ी गई साने इरम उर्फ महक के खातों में लाखों रुपये भेजे।
पूछताछ के दौरान महक ने स्वीकार किया कि उसके खाते में अज्ञात स्रोतों से रकम आई और उसे सरफराज ने मैसेंजर के माध्यम से भेजी गई राशि की जानकारी दी। महक ने यह भी बताया कि उसका सरफराज से प्रेम संबंध था। इस खुलासे ने सुरक्षा एजेंसियों को नेटवर्क की व्यापकता और इसके पाकिस्तानी कनेक्शन की पुष्टि करने में मदद की।
गाजियाबाद और फरीदाबाद में इस गिरोह की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है। फरीदाबाद से गिरफ्तार नौशाद अली के संपर्क में आने वाले लोगों की तलाश में पुलिस ने व्यापक छानबीन शुरू कर दी है। सूत्रों के अनुसार, नौशाद ने फरीदाबाद और आसपास के कई महत्वपूर्ण स्थलों की फोटो और वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर को भेजी थीं।
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह ने फरीदाबाद स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरे लगाने का प्लान भी तैयार किया था। इससे यह संकेत मिलता है कि गिरोह केवल फोटो और वीडियो भेजने तक सीमित नहीं था, बल्कि वह भारत के संवेदनशील स्थानों की निगरानी और डेटा एकत्र करने की योजना भी बना रहा था।
स्थानीय लोग और पंप कर्मचारियों के बयानों से पता चला कि नौशाद सामान्य तौर पर अपने आस-पास के लोगों के बीच सक्रिय रहता था। नचौली गांव के एक पेट्रोल पंप पर प्रदूषण नियंत्रण मशीन चलाने वाले मोनू ने बताया कि वह अक्सर नौशाद के साथ खाना खाता था, लेकिन कभी उसे अवैध गतिविधि करते हुए शक नहीं हुआ। इसके अलावा, नचौली पंप पर पहले मैनेजर के रूप में कार्यरत रविंद्र ने नौशाद को पंचर की दुकान शुरू करने की सलाह दी थी।
मुमताज उर्फ इम्तियाज ने भी बताया कि नौशाद के पिता जलालुद्दीन से उसे इस बारे में जानकारी मिली थी। हालांकि मुमताज ने खुद दुकान नहीं लगाई, लेकिन उसने नौशाद के फैसले की पुष्टि की। इस तरह से यह स्पष्ट होता है कि गिरोह के सदस्य और उनके संबंधी आसपास के सामान्य व्यवसायों में घुल-मिल कर सक्रिय थे, जिससे उनकी गतिविधियों पर नज़र रखना कठिन हो गया था।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि गिरोह के मुख्य सदस्य सुहेल मलिक के खातों में भारी मात्रा में लेन-देन हुआ। मनी ट्रेल की जांच से यह पता चला कि जासूसों को देश के संवेदनशील स्थानों की वीडियो, फोटो और रील भेजने के बदले में पैसे दिए गए। इसके अलावा, जावेद के पिता के बैंक खाते में भी विदेशी फंडिंग के संकेत मिले, जिससे पूरे नेटवर्क के पैतृक और पारिवारिक कनेक्शन की जांच का रास्ता खुला।
सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तान से भेजी गई रकम नेपाल में कई चरणों से गुजरती थी। पहले रकम को विभिन्न व्यवसायिक खातों में ट्रांसफर किया जाता और फिर गिरोह के सदस्यों तक नकद या ऑनलाइन माध्यम से पहुंचाया जाता। इस प्रक्रिया में 20-25% कमीशन लिया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान से भेजी गई रकम जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर और गैंगस्टर सरफराज द्वारा निर्देशित थी। सरफराज ने यह रकम मेसेंजर और अन्य डिजिटल माध्यमों से भेजी। इसके अलावा, नेटवर्क ने जासूसों को वीडियो और फोटो भेजने के बदले धनराशि दी।
फरीदाबाद और गाजियाबाद की स्थानीय पुलिस ने जासूसी कांड में गिरफ्तारी के बाद आसपास के संभावित सहयोगियों की तलाश तेज कर दी है। स्थानीय पंप कर्मचारी और व्यवसायी मीडिया से बात करने में बच रहे हैं, जिससे इस मामले की संवेदनशीलता और सुरक्षा कारणों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि गिरोह का संचालन केवल व्यक्तिगत स्तर पर नहीं था। इसके पीछे संगठित नेटवर्क और अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन था, जो पाकिस्तान और नेपाल से जुड़े विभिन्न वित्तीय माध्यमों से संचालित किया गया।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि इस खुलासे के बाद जासूसी नेटवर्क को भंग करने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके फंडिंग स्रोत, सहयोगियों और संवेदनशील स्थानों की जानकारी को लेकर जांच गहन रूप से चल रही है।
इस मामले में पकड़े गए नौशाद, सुहेल मलिक, महक और नेपाल निवासी गणेश के साथ अन्य सहयोगियों की भी पहचान की जा रही है। जांच यह सुनिश्चित करेगी कि गिरोह के सभी सदस्य और उनके पैसों के स्रोत पूरी तरह से उजागर हों और देश की सुरक्षा सुनिश्चित हो।

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