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पटना: स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने FCM थेरेपी कार्यक्रम का उद्घाटन, गंभीर एनीमिया से गर्भवती महिलाओं को मिलेगा राहत

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लखीसराय/पटना। जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। 26 मार्च 2026 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री श्री मंगल पांडे ने पटना स्थित ऊर्जा ऑडिटोरियम से FCM (Ferric Carboxy Maltose) थेरेपी कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य गंभीर एनीमिया, यानी रक्त अल्पता से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को एक ही इंजेक्शन के माध्यम से सुरक्षित और प्रभावी उपचार उपलब्ध कराना है।
FCM थेरेपी के तहत, केवल एक इंजेक्शन के माध्यम से महिलाओं के शरीर में आयरन की कमी पूरी की जाती है, जिससे गर्भावस्था के दौरान होने वाले कई जोखिम कम हो जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, गंभीर एनीमिया गर्भवती महिलाओं में थकान, कमजोरी और अन्य जटिलताओं का कारण बन सकता है, जो मातृत्व और शिशु स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। यही कारण है कि यह थेरेपी अत्यंत महत्वपूर्ण और समय पर स्वास्थ्य हस्तक्षेप के रूप में देखी जा रही है।
इस अवसर पर सदर अस्पताल में पहली बार FCM इंजेक्शन श्रीमती मधुकुमारी, निवासी दामोदरपुर, लखीसराय को दिया गया। अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य कर्मियों ने इस कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करने के लिए विशेष तैयारियाँ की थीं। उद्घाटन समारोह में अस्पताल प्रबंधक श्रीमती सीमा कुमारी, GNM श्रीमती रोशनी, पीरामल, डॉ. राकेश कुमार (डीवाई सुपरिटेंडेंट), तथा सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह मौजूद रहे। सभी उपस्थित अधिकारियों ने कार्यक्रम की समीक्षा करते हुए इसे जिले में गर्भवती महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम बताया।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बताया गया कि लखीसराय जिले के सभी प्रखंडों से एएनएम और आशा कार्यकर्ता 4-5 गंभीर एनीमिया से पीड़ित महिलाओं को एम्बुलेंस की सुविधा के माध्यम से सदर अस्पताल लाएंगे, ताकि उन्हें सुरक्षित और तुरंत उपचार उपलब्ध कराया जा सके। इस पहल का उद्देश्य केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को स्वास्थ्य और पोषण संबंधी जागरूकता देना भी है।
श्री मंगल पांडे ने उद्घाटन समारोह के दौरान कहा, "गर्भावस्था के दौरान गंभीर एनीमिया एक गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। FCM थेरेपी एक ऐसी प्रभावी तकनीक है जो कम समय में, कम प्रयास में महिलाओं को जीवन में बेहतर स्वास्थ्य दे सकती है। हमारा उद्देश्य है कि सभी प्रखंडों की गर्भवती महिलाओं को यह सुविधा बिना किसी बाधा के मिले।"
स्वास्थ्य मंत्री ने आगे कहा कि इस कार्यक्रम से न केवल महिलाओं की सेहत सुधरेगी, बल्कि शिशुओं की जन्म से पहले स्वास्थ्य समस्याओं में भी कमी आएगी। उन्होंने आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके निरंतर प्रयासों से ही यह कार्यक्रम सफल हो पाएगा।
अस्पताल प्रबंधक श्रीमती सीमा कुमारी ने बताया कि सदर अस्पताल में FCM इंजेक्शन निशुल्क उपलब्ध कराया जाएगा। इससे गंभीर एनीमिया से पीड़ित हर गर्भवती महिला को लाभ मिलेगा, भले ही वह किसी भी प्रखंड या क्षेत्र की हो। उन्होंने कहा, "हमारे अस्पताल की टीम ने यह सुनिश्चित किया है कि हर महिला को सुरक्षित वातावरण में इंजेक्शन दिया जाए और उसके स्वास्थ्य की निरंतर निगरानी की जाए।"
डॉ. राकेश कुमार और सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने बताया कि FCM थेरेपी के दौरान महिलाओं के स्वास्थ्य की निगरानी के लिए विशेष प्रक्रियाएं अपनाई गई हैं। कार्यक्रम में भाग लेने वाली सभी महिलाओं की स्वास्थ्य स्थिति का पूर्व मूल्यांकन किया गया और आवश्यकतानुसार उन्हें आगे की जाँच और पोषण संबंधी सलाह भी दी जाएगी।
इस कार्यक्रम के तहत, आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है ताकि वे गंभीर एनीमिया से पीड़ित गर्भवती महिलाओं की पहचान कर सकें और उन्हें समय पर FCM थेरेपी के लिए अस्पताल भेज सकें। इस पहल का उद्देश्य न केवल उपचार देना है, बल्कि महिलाओं और उनके परिवारों में रक्त की कमी के प्रभावों और सावधानियों के बारे में जागरूकता फैलाना भी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि FCM थेरेपी के नियमित उपयोग से गंभीर एनीमिया के मामलों में उल्लेखनीय कमी देखी जा सकती है। गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी को पूरी तरह से पूरा करना शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी बेहद लाभकारी है। इसके अलावा, यह थेरेपी माताओं में थकान और कमजोरी को कम करने में मदद करती है और प्रसव के समय जटिलताओं को कम करती है।
इस कार्यक्रम के सफल आयोजन से यह संदेश भी जाता है कि बिहार सरकार गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और उनके सुरक्षित प्रसव को अपनी प्राथमिकताओं में रखती है। यह पहल पूरे राज्य में अन्य जिलों के लिए भी मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है।
अंत में, यह कहा जा सकता है कि FCM थेरेपी कार्यक्रम लखीसराय जिले में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य सुधार के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। इससे महिलाओं की सेहत में सुधार आएगा, गंभीर एनीमिया के मामले कम होंगे, और नवजात शिशुओं का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा। स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्रखंडों से आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं को सक्रिय भूमिका निभाने के निर्देश दिए हैं, ताकि यह पहल सफलतापूर्वक पूरे जिले में लागू हो सके।

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